आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
जौनपुर मनरेगा घोटाला: सिकरारा और बक्शा समेत कई ब्लॉकों में फूटा फर्जीवाड़े का घड़ा, जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
जौनपुर जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में बड़े पैमाने पर चल रही सरकारी लूट और प्रशासनिक अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ है। जिला प्रशासन द्वारा कराए गए सघन भौतिक सत्यापन और जांच के बाद जिले के सिकरारा, बक्शा (पकड़ी क्षेत्र) और करंजाकला जैसे प्रमुख ब्लॉकों में फर्जी जॉब कार्ड धारकों, मशीनों के अवैध इस्तेमाल और तकनीकी हेरफेर के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
इस व्यापक भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने शासन के कड़े निर्देशों के तहत ब्लॉक-वार जांच बैठाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।
यह पूरी कार्रवाई मुख्य रूप से अप्रैल 2026 से लेकर मई 2026 के दौरान जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए विशेष जांच अभियानों और भौतिक सत्यापन के बाद अमल में लाई गई है।
सिकरारा ब्लॉक (फर्जी मस्टर रोल और अपात्रों का खेल): भौतिक सत्यापन के दौरान सैकड़ों ऐसे जॉब कार्ड मिले जो अपात्रों के नाम पर थे या जिनमें एक ही परिवार के कई सदस्यों को गलत तरीके से जोड़कर बजट खपाया जा रहा था। चिह्नित किए गए सैकड़ों फर्जी जॉब कार्डों को तुरंत निरस्त कर दिया गया है। इसके अलावा, जिन रोजगार सेवकों और तकनीकी सहायकों की निगरानी में यह खेल चल रहा था, उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
बक्शा और पकड़ी क्षेत्र (मशीनों का इस्तेमाल और हाजिरी में सेंधमारी): इस क्षेत्र में तालाबों की खुदाई और संपर्क मार्गों के निर्माण में मानव श्रम (मजदूरों) को दरकिनार कर गुपचुप तरीके से जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही, नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) ऐप पर मजदूरों की पुरानी और एक जैसी तस्वीरों को बार-बार री-अपलोड करके फर्जी हाजिरी दर्ज कराई जा रही थी। मशीनों से काम कराने की पुष्टि होने पर जिला प्रशासन ने संबंधित ग्राम पंचायतों के खाते (फंड ट्रांसफर) पर अस्थाई रोक लगा दी है। इसके साथ ही फर्जी हाजिरी के दोषी रोजगार सेवकों और महिला मेटों के खिलाफ सेवा समाप्ति और एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
करंजाकला और अन्य ब्लॉक (रिकवरी और एफआईआर की जद में जिम्मेदार): जांच समितियों को मस्टर रोल में दर्ज श्रमिकों के पते और जमीन पर काम करने वाले लोगों में भारी अंतर मिला। मृत और पलायन कर चुके लोगों के खातों में भी मजदूरी भेजी जा रही थी, जिसे बाद में बिचौलियों द्वारा निकाल लिया जाता था। इन ब्लॉकों में कुल मिलाकर हजारों अपात्र जॉब कार्डों को हमेशा के लिए ब्लॉक से हटा दिया गया है। गबन की गई सरकारी राशि को वसूलने के लिए संबंधित ग्राम प्रधानों और ग्राम विकास अधिकारियों (सचिवों) को वित्तीय रिकवरी के कड़े नोटिस जारी किए गए हैं।
इस ‘सरकारी लूट’ को पूरी तरह रोकने के लिए लखनऊ स्तर पर प्रमुख सचिव (ग्राम्य विकास) से लेकर जौनपुर के डीएम और सीडीओ ने मैदानी कर्मचारियों की कार्यशैली और रिपोर्टिंग को पूरी तरह से बदलने का खाका तैयार किया है, जिसके तहत रोजगार सेवकों और सेक्रेटरी (वीडीओ) के लिए अनिवार्य रोटेशन तबादला नीति लागू की जा रही है। इसके साथ ही लाइव जिओ-फेंस अटेंडेंस, लकी ड्रा आधारित औचक निरीक्षण और ड्रोन कैमरों से वीडियोग्राफी कराने की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है।