कबीर खड़ा बाजार में लिए लुकाठी हाथ…

कबीर खड़ा बाजार में लिए लुकाठी हाथ, जो घर फूंके अपना चले हमारे साथ..कबीर खड़ा बाजार में सबकी मांगे…

एक पल के कारने, ना कलंक लग जाए.

एक पुरानी कथा इस समय के लिए आज भी बिल्कुल प्रसांगिक है एक राजा को राज…

घर वापसी के आईने में- सरकार और उसके निर्णय -डा॰ गिरीश

आखिर प्रवासी मजदूरों, छात्रों और जहां तहां फंसे तीर्थ यात्रियों की घर वापसी का फैसला सरकार द्वारा…

कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए

कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर…

एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो …

ये जो शहतीर है पलकों पे उठा लो यारो ये जो शहतीर है पलकों पे उठा…

हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए…

हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए इस…