आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
रक्षा मंत्री के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा विपक्ष, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पायलटों की शहादत की अफवाहों पर दिया था जवाब: रक्षा मंत्रालय
नई दिल्ली
28 जून, 2026
केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सैनिकों की शहादत को लेकर सोशल मीडिया और विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे दावों को पूरी तरह से ‘भ्रामक और तथ्यहीन’ करार दिया है। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को एक कड़ा बयान जारी कर साफ किया कि संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान को संदर्भ से काटकर (Out of Context) राजनीतिक स्वार्थ के लिए उछाला जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सरकार ने कभी भी किसी सैनिक की शहादत की बात नहीं छिपाई।
क्या है पूरा मामला?
मई 2025 में हुए सफल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सर्वोच्च बलिदान देने वाले देश के 6 वीर जवानों के नाम हाल ही में राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में शामिल किए गए। इसके बाद कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के 28 जुलाई 2025 के संसद के उस बयान पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “हमारे किसी भी बहादुर सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा।” विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने संसद में झूठ बोला।
रक्षा मंत्रालय का करारा जवाब: उस समय ‘पायलटों’ को लेकर उड़ रही थी अफवाह
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने बयान जारी कर इस विवाद के पीछे की पूरी सच्चाई सामने रखी है। मंत्रालय के अनुसार:
विशिष्ट अफवाह का खंडन: जुलाई 2025 में जब संसद का सत्र चल रहा था, तब सोशल मीडिया और कुछ मीडिया हलकों में दुश्मन देश की ओर से यह दुर्भावनापूर्ण अफवाह फैलाई जा रही थी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना (IAF) के लड़ाकू विमानों के पायलटों को मार गिराया गया है या उन्हें पकड़ लिया गया है।
संदर्भ को छिपा रहा विपक्ष: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का वह बयान उसी विशिष्ट और खतरनाक प्रोपेगैंडा को खारिज करने के लिए था, जिससे देश का मनोबल गिर सकता था। उनका संदर्भ वायुसेना के पायलटों की सुरक्षा को लेकर था, न कि पूरे ऑपरेशन में हुए कुल सैन्य नुकसान को नकारने का। विपक्ष ने जानबूझकर पूरे 55 मिनट के भाषण में से केवल एक वाक्य को अलग करके विवाद खड़ा करने की कोशिश की है।
“ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता से ध्यान भटकाने की कोशिश”
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करना राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना के मनोबल के लिए ठीक नहीं है। सरकार ने याद दिलाया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सेना की एक बहुत बड़ी सामरिक जीत थी:
“इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय जांबाजों ने सीमा पार जाकर आतंकवादियों के 9 ठिकानों को तबाह किया, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी और पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। साथ ही पाकिस्तान के एयरबेस और एलओसी पर मौजूद सैन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। इस ऐतिहासिक सफलता से ध्यान भटकाने के लिए ही इस विवाद को हवा दी जा रही है।”
— आधिकारिक बयान, रक्षा मंत्रालय
शहादत को कभी नहीं छिपाया गया, पूरी सैन्य प्रक्रिया का हुआ पालन
सरकार ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि शहादत की जानकारी छिपाई गई। सैन्य नियमों के मुताबिक, किसी भी ऑपरेशन के बाद हताहतों का आधिकारिक और प्रशासनिक सत्यापन (Administrative Verification) किया जाता है। तय प्रक्रिया के तहत, 2025 के वार्षिक ‘रोल ऑफ ऑनर’ की सूची के साथ ही इन सभी 6 शहीदों के नाम पूरी गरिमा के साथ राष्ट्रीय समर स्मारक की ‘त्याग चक्र’ दीवारों पर अंकित किए गए हैं।
सरकार ने यह भी साफ किया कि सभी 6 शहीद परिवारों को बिना किसी देरी के शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय सहायता सहित सभी आवश्यक कल्याणकारी लाभ पहले ही पहुंचाए जा चुके हैं। सरकार राष्ट्र की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले हर सैनिक के सर्वोच्च बलिदान का सर्वोच्च सम्मान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।