आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
मनरेगा में भ्रष्टाचार और पकड़े गए प्रमुख खेल
जौनपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा (MGNREGA) योजना के तहत विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। हालिया सोशल ऑडिट, जिला लोकपाल (Ombudsman) की जांच और प्रशासनिक औचक निरीक्षणों में जो गंभीर गड़बड़ियां और भ्रष्टाचार के तरीके पकड़े गए हैं, उनका विस्तृत ब्योरा इस प्रकार है:
1. पकड़े गए भ्रष्टाचार के मुख्य तरीके (Modus Operandi)
मशीनों का अवैध उपयोग: नियमों के मुताबिक मनरेगा के कार्य पूरी तरह मानव श्रम (श्रमिकों द्वारा) से होने चाहिए। लेकिन जांच में पकड़ा गया कि कई जगहों पर रात के अंधेरे में जेसीबी (JCB) मशीनों से तालाबों की खोदाई और मिट्टी डलवाने का काम किया गया और दिन में कागजों पर सैकड़ों मजदूरों की फर्जी हाजिरी चढ़ा दी गई।
फर्जी मस्टर रोल और घोस्ट वर्कर्स (Ghost Workers): कई ग्राम पंचायतों में ऐसे लोगों के नाम पर भी महीनों तक पैसा निकाला गया जो या तो गांव में रहते ही नहीं थे (बाहर रहकर प्राइवेट नौकरी कर रहे थे) या फिर जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप पर फर्जी या पुरानी तस्वीरें अपलोड करने के खेल भी पकड़े गए हैं।
मटेरियल कंपोनेंट (पक्के कार्यों) में घोटाला: खड़ंजा, नाली और इंटरलॉकिंग निर्माण जैसे पक्के कार्यों में घटिया निर्माण सामग्री (पीली ईंटें, कम सीमेंट) का इस्तेमाल पाया गया। इसके अलावा, तकनीकी जांच में ‘दोहरा भुगतान’ का मामला भी सामने आया, जहाँ एक ही काम को दो अलग-अलग सरकारी बजट (जैसे मनरेगा और राज्य वित्त) से दिखाकर दो बार पैसा निकाला गया।
जॉब कार्ड बंधक बनाना: सीधे-साधे और अनपढ़ श्रमिकों के जॉब कार्ड और बैंक पासबुक कुछ बिचौलियों या स्थानीय कर्मियों द्वारा अपने पास जमा रख लिए जाते थे। उनके खातों में पैसा आने पर उन्हें बैंक ले जाकर अंगूठा लगवाया जाता था और मात्र थोड़ी सी रकम देकर पूरी मजदूरी हड़प ली जाती थी।
2. जांच के घेरे में आए क्षेत्र और मुख्य गड़बड़ियां
मुख्यालय से सटे ब्लॉक: इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से डिजिटल हाजिरी में हेरफेर और मृत या प्रवासी लोगों के खातों में पैसा भेजने के मामले तकनीकी जांच में पकड़े गए हैं।
सुदूर और सीमावर्ती ग्रामीण ब्लॉक: इन इलाकों में मिट्टी के कार्यों में मशीनों का धड़ल्ले से उपयोग और श्रमिकों के अधिकारों के हनन (जॉब कार्ड अपने पास रखने) की शिकायतें सोशल ऑडिट में सबसे ज्यादा सही पाई गईं।
पक्के निर्माण वाले क्षेत्र: जिन ब्लॉकों में सामुदायिक शौचालय, सोखता गड्ढा या मनरेगा पार्क के निर्माण चल रहे थे, वहाँ आधी-अधूरे काम पर ही फाइल बंद कर पूरी धनराशि निकालने के मामले पकड़े गए।
3. गड़बड़ी पकड़े जाने पर प्रशासनिक कार्रवाई
जब भी इस तरह के मामले साक्ष्यों के साथ सामने आते हैं, तो जिला प्रशासन और विकास विभाग द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं:
वित्तीय रिकवरी (Recovery): पंचायती राज अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत दोषी पाए जाने वाले प्रधानों, सचिवों या तकनीकी सहायकों से गबन की गई सरकारी राशि की वसूली के आदेश दिए जाते हैं।
विभागीय और कानूनी कार्रवाई: गंभीर वित्तीय अनियमितता मिलने पर संबंधित कर्मियों (जैसे रोजगार सेवक या तकनीकी सहायक) की सेवाएं समाप्त की जाती हैं और उनके खिलाफ स्थानीय थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाती है।
वित्तीय अधिकार सीज करना: दोषी ग्राम प्रधानों के बैंक खातों के संचालन पर रोक लगाते हुए जांच पूरी होने तक उनके वित्तीय अधिकार रोक दिए जाते हैं।