आलोक वर्मा जौनपुर ब्यूरो,।
जौनपुर में मंदिर सौंदर्यीकरण परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप; विपक्ष ने की जांच की मांग
जौनपुर। जौनपुर सदर विधानसभा क्षेत्र के दो प्रमुख धार्मिक स्थलों पर चल रहे पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं और घटिया निर्माण के आरोप सामने आए हैं।
स्थानीय नागरिक संगठनों और विपक्षी नेताओं ने ऐतिहासिक शीतला चौकिया धाम और रासमंडल क्षेत्र स्थित बड़े हनुमान मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए आवंटित सरकारी धन के उपयोग पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जमीन पर किया गया वास्तविक बुनियादी ढांचा निर्माण, इन परियोजनाओं के लिए स्वीकृत करोड़ों रुपये के बजट से मेल नहीं खाता है।
ऑडिट पर उठते सवाल
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, जिले के एक प्रमुख तीर्थ स्थल शीतला चौकिया धाम में तालाब और उससे सटे घाटों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए लगभग ₹3.42 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था। इसके अतिरिक्त, राज्य पर्यटन विभाग की योजना के तहत बड़े हनुमान मंदिर में सुविधाओं के उन्नयन के लिए ₹1.06 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी।
हालांकि, स्थानीय निवासियों और कार्यकर्ताओं ने इसके क्रियान्वयन में गंभीर विसंगतियों की ओर इशारा किया है। नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “हनुमान मंदिर में एक करोड़ से अधिक की परियोजना के नाम पर दृश्यमान निर्माण केवल 20×20 फीट के एक छोटे हॉल और एक साधारण शौचालय ब्लॉक तक ही सीमित है। उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता भी खराब है। हम इस खर्च के तत्काल तकनीकी ऑडिट की मांग करते हैं।”
राजनीतिक सरगर्मी
यह विवाद तेजी से राजनीतिक रंग ले चुका है, क्योंकि बड़े हनुमान मंदिर की स्थिति जौनपुर सदर के विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव के कैंप कार्यालय से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर है।
विपक्ष ने प्रशासनिक मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण का आरोप लगाते हुए सत्तापक्ष को घेरने का मौका नहीं गंवाया है। विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका दावा है कि संबंधित कार्यदायी संस्थाएं “प्रशासनिक संरक्षण” के तहत काम कर रही हैं।
प्रशासन ने आरोपों को नकारा
आरोपों का खंडन करते हुए, कार्यदायी संस्था और क्षेत्रीय पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सभी कार्य स्वीकृत तकनीकी विशिष्टताओं (Technical Specifications) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के पूर्ण अनुपालन में किए जा रहे हैं।
एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, “आवंटित धन में केवल ऊपर दिखने वाली ईंट-तेंदू की संरचनाएं ही शामिल नहीं हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर भूमिगत कार्य, साइट लेवलिंग, इलेक्ट्रिकल लेआउट और विरासत संरक्षण के लिए विशेष रूप से की जाने वाली सैंडस्टोन क्लैडिंग का काम भी शामिल है। परियोजना की निगरानी बहु-स्तरीय व्यवस्था के तहत की जा रही है, और किसी भी वित्तीय घोटाले की बात पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित है।”
जहां एक ओर इस मामले को लेकर राजनीतिक खींचतान जारी है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय श्रद्धालु इस उधेड़बुन में हैं कि उनके ऐतिहासिक आध्यात्मिक स्थलों के कायाकल्प का यह वादा प्रशासनिक देरी और विवादों की भेंट न चढ़ जाए।