नीट परीक्षा केंद्र विवाद और तकनीकी सच केवल सरकार या सिस्टम को दोष नहीं दे सकते

Alok Verma, Jaunpur Bueauro,

नीट परीक्षा केंद्र विवाद और तकनीकी सच
केवल सरकार या सिस्टम को दोष नहीं दे सकते

नागपुर के एक छात्र का नीट परीक्षा केंद्र अबू धाबी आने और समय रहते जानकारी न मिलने के कारण परीक्षा छूटने का मामला चर्चा में है।
केंद्र चयन की प्रक्रिया के तहत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के नियमों के मुताबिक परीक्षा केंद्रों का निर्धारण छात्र द्वारा आवेदन फॉर्म में चुनी गई प्राथमिकताओं के आधार पर होता है। सिस्टम अपने आप किसी भी उम्मीदवार को देश से बाहर का केंद्र अलॉट नहीं करता। तकनीकी तौर पर यह फॉर्म भरते समय गलत शहर चुने जाने का मामला हो सकता है।
अग्रिम सूचना की व्यवस्था के अंतर्गत एजेंसी परीक्षा से कुछ दिन पहले सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी करती है, जिससे छात्रों को उनके परीक्षा शहर की जानकारी पहले ही मिल जाती है। एडमिट कार्ड परीक्षा से दो-तीन दिन पहले आता है। यदि छात्र या अभिभावक समय रहते इस जानकारी को देख लेते, तो इस त्रुटि को सुधारने या शिकायत दर्ज कराने का समय मिल सकता था। ऐन वक्त पर देखने के कारण यह अवसर नहीं बचा।
प्रणाली की सीमाओं की बात करें तो भले ही यह चूक छात्र या फॉर्म भरने वाले के स्तर पर हुई हो, लेकिन यह मौजूदा सॉफ्टवेयर की कमी को भी दर्शाती है। यदि छात्र का पता और जमा की गई फीस भारतीय पते के अनुसार है, तो सिस्टम को विदेशी केंद्र चुने जाने पर एक चेतावनी या क्रॉस-वेरिफिकेशन का विकल्प देना चाहिए, ताकि ऐसी बड़ी मानवीय गलतियों को शुरुआत में ही रोका जा सके।
यह घटना यह स्पष्ट करती है कि जहाँ एक ओर फॉर्म भरने और नोटिफिकेशन को समय पर चेक करने में अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा प्रणाली के सॉफ्टवेयर को भी अधिक सुरक्षित और व्यावहारिक बनाने की ज़रूरत है।

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