कागज़ी बैठकों में सिमटी जौनपुर की बिजली व्यवस्था: साहबों के आदेश बेअसर, अघोषित कटौती से जनता में त्राहि-त्राहि

आलोक वर्मा, जौनपुर, ब्यूरो,

कागज़ी बैठकों में सिमटी जौनपुर की बिजली व्यवस्था: साहबों के आदेश बेअसर, अघोषित कटौती से जनता में त्राहि-त्राहि

सभागार की समीक्षा बैठकों में सुधर रही बिजली व्यवस्था, लेकिन ज़मीन पर हर मोहल्ला अंधेरे में डूबा। अधिकारियों को नहीं रहा जिलाधिकारी की चेतावनी का डर, अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज से बेहाल जौनपुर।
आलोक वर्मा संवाददाता, जौनपुर।
जौनपुर कलेक्ट्रेट सभागार के वातानुकूलित कमरे में जब जिलाधिकारी विद्युत विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे, ठीक उसी समय शहर के अधिकांश मोहल्ले भीषण गर्मी और अघोषित बिजली कटौती से जूझ रहे थे। सरकारी तंत्र में बैठकों का दौर और दावों की फेहरिस्त तो बहुत लंबी है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि जौनपुर की बिजली व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। अधिकारियों के अंदर न तो जनता की तकलीफों को लेकर कोई संवेदनशीलता बची है और न ही ज़िला प्रशासन की चेतावनियों का कोई डर रह गया है।
बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि आगामी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और नीट परीक्षा के मद्देनजर २१ जून को किसी भी प्रकार के मेंटेनेंस या निर्माण कार्य के नाम पर कटौती न की जाए। लेकिन सच तो यह है कि जौनपुर की जनता को बिना किसी मेंटेनेंस के ही चौबीस घंटे में से बमुश्किल कुछ घंटे बिजली नसीब हो रही है। रात भर होने वाली आँख-मिचौली ने बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों का जीना दूभर कर दिया है। कागज़ों पर भले ही फॉल्ट और ट्रिपिंग के बहाने तैयार कर लिए जाते हों, लेकिन हकीकत में यह विभाग की घोर लापरवाही और नाकामी का नतीजा है।
समीक्षा बैठक में आईजीआरएस पोर्टल पर उपभोक्ता संतुष्टि के आंकड़ों को लेकर पीठ थपथपाई गई, जिसमें खंड तृतीय में सत्तर प्रतिशत उपभोक्ताओं के संतुष्ट होने का दावा किया गया। यह आंकड़े कितने हवा-हवाई हैं, इसका अंदाजा लाइन बाज़ार, ओलांदगंज, मियांलपुर और जगदीशपुर जैसे मोहल्लों में जाकर लगाया जा सकता है, जहाँ लगातार हो रही कटौती के कारण लोग पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। जिलाधिकारी ने सख्त हिदायत दी है कि ट्रांसफार्मर नहीं जलने चाहिए और खराब होने पर उन्हें तय समय में बदला जाए, लेकिन हकीकत यह है कि जिले के कई इलाकों में ओवरलोड ट्रांसफार्मर हफ्तों तक धू-धू कर जलते रहते हैं और लोग अंधेरे में कटे हुए ट्रांसफार्मर के बदलने का इंतजार करते हैं।
जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि किसी भी प्रकार की जनहानि या पशुहानि होने पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी। मगर सवाल यह उठता है कि क्या केवल दुर्घटना होने के बाद ही कार्रवाई होगी? क्या जौनपुर की सड़कों और गलियों में लटकते जर्जर तार, बिना अर्थिंग के खड़े पोल और खुले पड़े जंक्शन बॉक्स अधिकारियों की लापरवाही को बयां नहीं करते? मानसून सिर पर है, लेकिन पेड़ों की छंटाई और अर्थिंग का काम अब तक सिर्फ सरकारी फाइलों और बैठकों के एजेंडे तक ही सीमित है।
साफ है कि जौनपुर का बिजली विभाग पूरी तरह से बेलगाम हो चुका है। हर महीने कलेक्ट्रेट में होने वाली ये भारी-भरकम बैठकें और उनमें जारी होने वाले लंबे-चौड़े निर्देश महज एक सरकारी औपचारिकता बनकर रह गए हैं। अधिकारियों को न तो जनता के आक्रोश की परवाह है और न ही प्रशासनिक कार्रवाई का कोई खौफ। जब तक इन कागज़ी बैठकों से इतर ज़मीन पर लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक जौनपुर की जनता को इस अघोषित बिजली कटौती के नरक से मुक्ति मिलना नामुमकिन नजर आता है।

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