एक लाख का इनामी और सुलगते सवाल: क्या जौनपुर में राजनीतिक संरक्षण के आगे बेअसर साबित हो रहा है कानून का हंटर?

आलोक वर्मा, जौनपुर, ब्यूरो,

एक लाख का इनामी और सुलगते सवाल: क्या जौनपुर में राजनीतिक संरक्षण के आगे बेअसर साबित हो रहा है कानून का हंटर?

आधी रात को धरने पर बैठीं सौम्या बिंद, मनाने पहुंचे डीएम और एसपी; क्या भोले राजभर का राजनीतिक रसूख काम आया? आखिर कौन सा भाजपा नेता बचा रहा है इस एक लाख के इनामी को? सौम्या बिंद को न्याय दिलाने में क्यों देर कर रही है योगी सरकार और क्यों खामोश है बाबा का बुलडोजर?
आलोक वर्मा, जौनपुर।
जौनपुर। चर्चित आजाद बिंद दूल्हा हत्याकांड के एक लाख रुपये के इनामी आरोपी भोले राजभर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हालांकि अदालत ने उसके खिलाफ दर्ज हत्या की एफआईआर को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने आरोपी को 60 दिनों के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण कर जमानत अर्जी दाखिल करने का अवसर देते हुए इस अवधि तक गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया है।
खेतासराय थाना क्षेत्र में दर्ज आजाद बिंद दूल्हा हत्याकांड में नामजद आरोपी भोले राजभर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दो मई 2026 को दर्ज एफआईआर को निरस्त करने तथा गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता की ओर से स्वयं को निर्दोष बताते हुए फर्जी तरीके से फंसाए जाने का दावा किया गया। वहीं राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए आरोपों को गंभीर बताया गया।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विवेक सारण की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला एफआईआर निरस्त करने योग्य नहीं है। अदालत ने एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। हालांकि, याची के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि वह 60 दिनों के भीतर संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण कर नियमित अथवा अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करता है तो उसकी अर्जी पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भोले राजभर पहले से गिरफ्तार नहीं है तो अगले 60 दिनों तक उसे इस मुकदमे में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। खंडपीठ ने यह भी कहा कि निर्धारित अवधि के भीतर आत्मसमर्पण न करने की स्थिति में आरोपी के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
इस आदेश के बाद पीड़ित परिवार का सब्र का बांध टूट गया। न्याय की मांग को लेकर सौम्या बिंद आधी रात को ही धरना प्रदर्शन पर बैठ गईं। मामले की संवेदनशीलता और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए ज़िला प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थिति को संभालने के लिए खुद जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) भारी पुलिस बल के साथ आधी रात को धरना स्थल पर सौम्या बिंद से मिलने पहुंचे। आला अधिकारियों ने पीड़िता को ढांढस बंधाया और कड़ी कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन इस आधी रात के ड्रामे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोर्ट के इस आदेश और प्रशासनिक हलचल के बाद जौनपुर की सियासत और आम जनता के बीच सवालों का बाजार गर्म हो गया है। लोग खुलकर पूछ रहे हैं कि क्या भोले राजभर का राजनीतिक रसूख उसके काम आ रहा है? जौनपुर के सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर वह कौन सा कद्दावर भाजपा नेता है, जो पर्दे के पीछे से भोले राजभर को बचाने का ताना-बाना बुन रहा है?
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था के नाम पर अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलना एक आम बात हो चुकी है, लेकिन इस हाईप्रोफाइल मामले में अब तक बुलडोजर खामोश क्यों है? जनता पूछ रही है कि एक लाख के इनामी भोले राजभर और उसके साथियों के घरों पर अब तक प्रशासन का बुलडोजर क्यों नहीं गरजा? क्या अपराधियों पर कार्रवाई भी चेहरे और रसूख देखकर तय की जा रही है?
आजाद बिंद दूल्हा हत्याकांड ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। इस त्रासदी के बाद पीड़ित सौम्या बिंद लगातार न्याय की गुहार लगा रही हैं, लेकिन आरोपी को मिली इस नई राहत के बाद योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। सौम्या बिंद को न्याय दिलाने में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है और प्रशासन इस मामले में ढिलाई क्यों बरत रहा है, यह जौनपुर की जनता के बीच सबसे बड़ा सुलगता हुआ सवाल बन चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *