जौनपुर की जनता को रुला रखा है बिजली विभाग की कटौती व्यवस्था ने

आलोक वर्मा, जौनपुर, ब्यूरो,

जौनपुर की जनता को रुला रखा है बिजली विभाग की कटौती व्यवस्था ने

जौनपुर में बिजली का महासंकट: वीआईपी से लेकर स्लम तक… शहर का ऐसा कोई मोहल्ला नहीं जहाँ त्राहि-त्राहि न हो

रात भर आँख-मिचौली से बेहाल जनता, उमस और गर्मी ने छीनी रात की नींद। लाइन बाज़ार से ओलदगंज तक, हर इलाके का एक ही हाल; व्यापार ठप, सुबह पानी के लिए मची किल्लत। कागज़ों पर 24 घंटे सप्लाई के दावे ज़मीन पर हुए धड़ाम; अधिकारियों के पास लोकल फॉल्ट का पुराना बहाना।
जौनपुर।
प्रदेश सरकार के दावों के उलट जौनपुर शहर इन दिनों बिजली की भयंकर किल्लत और अघोषित कटौती की मार झेल रहा है। भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ उमस के बीच बिजली विभाग की लचर व्यवस्था ने आम जनजीवन को परेशान कर दिया है। हालत यह है कि शहर का कोई एक मोहल्ला या इलाका नहीं, बल्कि पूरा शहर ही इस समय अंधेरे और अव्यवस्था के साए में जीने को मजबूर है।
हर मोहल्ले की एक ही कहानी: रात कटी करवटें बदलते
शहर के मुख्य व्यावसायिक केंद्र ओलदगंज, चहारसू चौराहा, लाइन बाज़ार हो या फिर मियांपुर, जगदीशपुर, रासमंडल और सिद्दीकपुर जैसे घने रिहायशी इलाके—हर जगह बिजली की आँख-मिचौली का खेल जारी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात होते ही कटौती का सिलसिला शुरू हो जाता है। 5 से 10 मिनट के लिए बिजली आती है और फिर घंटों के लिए गायब हो जाती है। रात भर जागने के कारण बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की हालत सबसे ज़्यादा खराब है। घरों में लगे इन्वर्टर भी लगातार कटौती के कारण चार्ज नहीं हो पा रहे हैं और दम तोड़ चुके हैं।
धंधा चौपट, सुबह पानी का संकट
इस अघोषित कटौती ने शहर के छोटे और मझोले व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। साइबर कैफे, टेलरिंग शॉप, वेल्डिंग और छोटे कारखाने बिजली न रहने से ठप पड़े हैं। जनरेटर चलाने से लागत इतनी बढ़ जाती है कि मुनाफा शून्य हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ, रात भर की कटौती का सीधा असर सुबह की जलापूर्ति पर पड़ रहा है। बिजली न होने से टंकियां नहीं भर पा रही हैं, जिससे अब मोहल्लों में पानी के लिए भी हाहाकार मचने लगा है।
कागज़ी दावों और ज़मीनी हकीकत में ज़मीन-आसमान का अंतर
जनता का सबसे बड़ा आक्रोश इस बात को लेकर है कि हर महीने भारी-भरकम बिजली बिल वसूलने वाला विभाग संकट के समय पूरी तरह नदारद रहता है। जब भी टोल-फ्री नंबर या स्थानीय सब-स्टेशन पर फोन किया जाता है, तो लोकल फॉल्ट, ओवरलोडिंग या ऊपर से रोस्टरिंग का रटा-रटाया जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *