विकास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा: ढिलाई बरतने पर अधिकारियों को सख्त चेतावनी

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

विकास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा: ढिलाई बरतने पर अधिकारियों को सख्त चेतावनी, गुणवत्ता से समझौता नाकामी माना जाएगा
जौनपुर। उत्तर प्रदेश शासन के नगर विकास, ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग तथा जनपद के प्रभारी मंत्री श्री ए.के. शर्मा ने विकास परियोजनाओं की धीमी गति और प्रशासनिक शिथिलता पर कड़ा रुख अपनाया है। जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या मानकों से समझौता अक्षम्य होगा।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की स्पष्ट मंशा है कि जनहित की योजनाएं बिना किसी प्रशासनिक बाधा के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। जो भी विभाग तय समय सीमा और गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, उसके विरुद्ध सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक में दिए गए कड़े प्रशासनिक निर्देश:
सड़क एवं जलभराव प्रबंधन: लोक निर्माण विभाग (PWD) को बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की अविलंब मरम्मत करने के निर्देश दिए गए। नगर निकायों को जलभराव रोकने, नाला सफाई सुनिश्चित करने तथा संचारी रोगों के उन्मूलन के लिए युद्धस्तर पर फॉगिंग व सैनिटाइजेशन अभियान चलाने को कहा गया।
कांवड़ यात्रा सुरक्षा एवं व्यवस्था: कांवड़ मार्गों पर स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़े हर पहलू पर शून्य-त्रुटि नीति अपनाने का आदेश दिया गया।
विद्युत तंत्र एवं सुरक्षा: ऊर्जा विभाग को सख्त निर्देश दिए गए कि कांवड़ मार्गों पर लटकते हुए तार और जर्जर पोल तत्काल हटाए जाएं। किसी भी अप्रिय घटना या दुर्घटना के लिए विभागीय लापरवाही को जिम्मेदार माना जाएगा। किसानों को निर्धारित रोस्टर के तहत बिना कटौती बिजली उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया।
कृषि, पशुपालन एवं सिंचाई: नहरों के अंतिम छोर (टेल) तक पानी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने, उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने तथा 100% पशुओं का टीकाकरण अनिवार्य रूप से पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए।
स्वास्थ्य एवं जनसमस्याएं: जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की कमी है, वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था कर आमजन को राहत देने का निर्देश दिया गया। जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए जनहित से जुड़े मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर निस्तारित करने की हिदायत अधिकारियों को दी गई।

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