परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक के खिलाफ अनशन के 16वें दिन सोनम वांगचुक की स्थिति अत्यंत नाजुक, स्वास्थ्य बिगड़ने पर जारी हुआ आपातकालीन संदेश

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक के खिलाफ अनशन के 16वें दिन सोनम वांगचुक की स्थिति अत्यंत नाजुक, स्वास्थ्य बिगड़ने पर जारी हुआ आपातकालीन संदेश

​नई दिल्ली: देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार, परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों के खिलाफ राजधानी में चल रहा आंदोलन अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। इन मांगों को लेकर पिछले 16 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रख्यात शिक्षाविद् और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है, जिससे उनके समर्थकों और चिकित्सकों के बीच गहरी चिंता व्याप्त हो गई है। आंदोलन स्थल से जारी एक आपातकालीन संदेश (SOS) में आगाह किया गया है कि वांगचुक की स्थिति दिन-ब-दिन और अधिक चिंताजनक होती जा रही है।
​आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा साझा की गई चिकित्सीय रिपोर्ट के अनुसार, 16 दिनों के कड़े उपवास के कारण सोनम वांगचुक का रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) गिरकर 104/66 mm Hg पर पहुंच गया है, जो सामान्य स्तर से काफी कम है। इसके अतिरिक्त, इस लंबी भूख हड़ताल के दौरान उनके शरीर का कुल वजन 7.8 किलोग्राम तक घट चुका है। डॉक्टरों ने उनके शरीर में ऊर्जा और आवश्यक तत्वों की भारी कमी को देखते हुए स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।
​देश के छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की मांग को लेकर जारी इस आंदोलन में वांगचुक की बिगड़ती शारीरिक स्थिति ने शासन और प्रशासन पर इस संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने का दबाव बढ़ा दिया है। सहयोगियों ने सरकार से अपील की है कि वे इस स्थिति की गंभीरता को समझें और वांगचुक के जीवन की रक्षा के लिए अविलंब उचित कदम उठाएं।
परीक्षा विसंगतियों के खिलाफ जोधपुर जेल के ऐतिहासिक संघर्षों के बाद अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर मोर्चा । देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार और नीट (NEET) पेपर लीक जैसी गंभीर विसंगतियों के खिलाफ राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। इस आंदोलन के समर्थन में पिछले 16 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे देश के प्रख्यात पर्यावरणविद, वैज्ञानिक और शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है। आंदोलन स्थल से साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस कड़े उपवास के कारण वांगचुक का वजन 8 किलोग्राम से अधिक घट चुका है, जिससे चिकित्सकों और समर्थकों के बीच गहरी चिंता व्याप्त हो गई है।
​यह पहला अवसर नहीं है जब सोनम वांगचुक देश के किसी संवेदनशील मुद्दे पर इस तरह के कठिन संघर्ष की राह पर हैं। इससे पूर्व भी जनहित और सामाजिक सुधारों से जुड़े विभिन्न मोर्चों पर उनका लंबा और गहरा इतिहास रहा है, जिसमें राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल के दौरान किया गया उनका संघर्ष भी प्रमुखता से शामिल है। अतीत के इन कड़े अनुभवों के बाद, अब वे दिल्ली में देश के छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की मांग को लेकर एक बार फिर अडिग दिखाई दे रहे हैं।
​लगातार 16 दिनों से जारी इस अन्न त्याग और गिरते स्वास्थ्य के बीच आंदोलन स्थल से आपातकालीन चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। सहयोगियों ने शासन और प्रशासन से इस गंभीर स्थिति का तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है, ताकि वांगचुक के जीवन की रक्षा की जा सके और छात्रों की मांगों पर सकारात्मक विचार कर इस गतिरोध को अविलंब सुलझाया जा सके।

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