आलोक वर्मा संवाददाता जौनपुर।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा
एसआईटी ने की तीन घंटे पूछताछ
अयोध्या में राम मंदिर के दान पात्रों से चढ़ावे की राशि की हेराफेरी को लेकर उपजा विवाद अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मामले की निष्पक्षता बनाए रखने और जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज और विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने आधिकारिक तौर पर इस इस्तीफे की पुष्टि की है। इस बीच मामले की जांच कर रही उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम और अयोध्या पुलिस ने पूर्व महासचिव चंपत राय से उनके भारत कुटी निवास पर लगभग तीन घंटे तक गहन पूछताछ की है।
विशेष जांच टीम की अंतरिम रिपोर्ट के बाद इस पूरे मामले का भंडाफोड़ हुआ। जांच में सामने आया कि मंदिर के दान पात्रों से नकदी निकालने, वाउचर बनाने, नोट गिनने और बैंक में जमा करने वाली यूनिट में पिछले दो से तीन साल से एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था। जांच टीम की सिफारिश पर ट्रस्ट के सदस्य कृष्णा मोहन की शिकायत पर पच्चीस जून को प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसके बाद आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने अब तक आरोपियों के पास से लगभग अस्सी लाख रुपये की नकदी और कुछ विदेशी मुद्रा बरामद की है। इनके बैंक खातों की जांच के लिए पुलिस स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अयोध्या धाम शाखा भी पहुंची है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ चंपत राय के पुराने सहयोगी और पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की गिरफ्तारी से आया। जांच टीम के अनुसार टिन्नू यादव के पास नियमों का उल्लंघन करते हुए मंदिर के कई मुख्य दान पात्रों की चाबियां थीं। आरोप है कि उसी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने रिश्तेदारों को आउटसोर्सिंग के जरिए नोट गिनने वाली टीम में शामिल करवाया था।
पुलिस और विशेष जांच टीम की पूछताछ के दौरान चंपत राय ने इस हेराफेरी में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने जांच अधिकारियों को बताया कि चढ़ावे की चोरी में उनकी कोई भूमिका नहीं है। जैसे ही उन्हें इस बात की भनक लगी, उन्होंने तुरंत कदम उठाए और आरोपियों को पकड़वाने में मदद की। हालांकि यह उनकी जिम्मेदारी थी कि मंदिर के चढ़ावे के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि जून के शुरुआती हफ्ते में सीसीटीवी फुटेज के जरिए चोरी सामने आने के बावजूद पच्चीस जून तक प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी क्यों की गई।
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने दिल्ली में बयान जारी कर कहा कि चंपत राय पर इस्तीफे का कोई दबाव नहीं था, उन्होंने जांच की शुचिता बनाए रखने के लिए खुद पद छोड़ा है। परिषद ने स्पष्ट किया कि आरोपियों के साथ उनकी कोई सहानुभूति नहीं है और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने देश विदेश के रामभक्तों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि राम मंदिर में हुई इन घटनाओं से वे बेहद स्तब्ध और आहत हैं। उन्होंने भक्तों को विश्वास दिलाया कि मंदिर में दान किया गया सोना, चांदी और अन्य कीमती सामान पूरी तरह सुरक्षित है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
इस बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने चंपत राय की व्यक्तिगत ईमानदारी का बचाव किया है, लेकिन साथ ही मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की वकालत की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगामी ग्यारह जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक को पहले खिसकाकर अब छह जुलाई को अयोध्या में आयोजित करने का फैसला लिया गया है।