जेसीज से वाजिदपुर के बीच दम तोड़ते जल क्षेत्र को बचाने के लिए उठी जौनपुर की आवाज

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

जेसीज से वाजिदपुर के बीच दम तोड़ते जल क्षेत्र को बचाने के लिए उठी जौनपुर की आवाज

कूड़ा पाटकर जल क्षेत्र खत्म करने का आरोप और कृष्णा हार्ट केयर के पास बचे हिस्से को झील बनाने की मांग
जौनपुर। जौनपुर शहर का दिल कहे जाने वाले जेसीज चौराहा से वाजिदपुर तिराहा मार्ग के बीच का प्राकृतिक जल क्षेत्र आज अपने अस्तित्व की आखिरी लड़ाई लड़ रहा है। आज से 15 से 20 वर्ष पूर्व तक इस पूरे मार्ग के दोनों तरफ एक विशाल जल क्षेत्र और बड़ा नाला झील के स्वरूप में मौजूद था। यह जल क्षेत्र न सिर्फ शहर के पर्यावरण को संतुलित रखता था बल्कि भूगर्भ जल स्तर को बनाए रखने में भी बड़ी भूमिका निभाता था। लेकिन समय के साथ बढ़ते अतिक्रमण और प्रशासनिक अनदेखी के कारण यह विशाल जल क्षेत्र अब पूरी तरह सिकुड़ चुका है।
वर्तमान स्थिति यह है कि अब केवल कृष्णा हार्ट केयर के बगल में ही कुछ सौ वर्ग मीटर सरकारी जल क्षेत्र शेष बचा है। स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग ने अब इस बचे हुए हिस्से को बचाने के लिए आवाज उठाना शुरू कर दिया है। नागरिकों का कहना है कि जहाँ लोगों ने बस्तियाँ और इमारतें बना ली हैं, उन्हें अब तोड़ना भले व्यावहारिक न हो, लेकिन जो हिस्सा अभी सुरक्षित है उसे हर हाल में बचाया जाना चाहिए।
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आ रहा है कि नगर पालिका के ट्रैक्टर रात के अंधेरे में ही नहीं बल्कि दिन के उजाले में भी इस बचे हुए जल क्षेत्र में शहर का कूड़ा-कचरा लाकर डाल रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस लापरवाही के कारण बचे हुए हिस्से का एक चौथाई भाग भी मलबे के नीचे दब चुका है। आशंका जताई जा रही है कि अगर इसे तुरंत नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों में इस बेशकीमती सरकारी जमीन पर भी अवैध कब्जा हो जाएगा।
यह स्थिति जौनपुर जनपद के लिए इसलिए भी दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि यहाँ समाजसेवियों, दिग्गज मीडियाकर्मियों और बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की कोई कमी नहीं रही है। पिछले वर्षों में जितने भी नए जिलाधिकारी यहाँ आए, उनमें से अधिकांश ने जेसीज चौराहे से वाजिदपुर तिराहे तक के इस जल क्षेत्र को संरक्षित करने की घोषणाएं कीं। लेकिन धरातल पर कार्रवाई होने के बजाय हर अधिकारी के कार्यकाल के साथ यह क्षेत्र और छोटा होता चला गया।
अब जौनपुर की जनता, जनप्रतिनिधियों और मीडिया से यह भावुक अपील की जा रही है कि वे अपनी आत्मा को जाग्रत करें और इस बचे हुए हिस्से को संरक्षित करने के लिए आगे आएं। मांग की जा रही है कि कृष्णा हार्ट केयर के पास बचे हुए इस जल क्षेत्र की तुरंत घेराबंदी की जाए, वहाँ बड़े पैमाने पर पेड़-पौधे लगाए जाएं और इसे एक खूबसूरत झील या पार्क का स्वरूप दिया जाए। जल संरक्षण अभियान के इस दौर में जौनपुर के इस हिस्से को भू-माफियाओं और कूड़े से बचाना प्रशासन और जनता दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी बन चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *