Alok Verma, Jaunpur Bueauro,
₹500 करोड़ से अधिक खर्च के बावजूद गोमती नदी में गिर रहा कचरा, स्वच्छता योजनाओं पर उठे सवाल
जौनपुर। केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा गोमती नदी के संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए करोड़ों रुपये की विभिन्न योजनाएं संचालित की गई हैं। इनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), अमृत योजना तथा अन्य शहरी विकास परियोजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं पर अब तक ₹500 करोड़ से अधिक की राशि खर्च होने की बात कही जाती रही है।
इसके बावजूद शहर के कई स्थानों पर नालों का पानी और ठोस कचरा गोमती नदी में गिरने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों का आरोप है कि स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं।
नागरिकों का कहना है कि यदि सीवेज शोधन संयंत्र एवं अन्य परियोजनाएं प्रभावी ढंग से संचालित हो रही हैं, तो फिर नदी में प्रदूषित पानी और कचरा पहुंचने की समस्या क्यों बनी हुई है। लोगों ने संबंधित विभागों से योजनाओं की वर्तमान स्थिति, संचालन क्षमता और खर्च की गई धनराशि का सार्वजनिक विवरण जारी करने की मांग की है।
वहीं विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि कहीं लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नदी प्रदूषण रोकने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं और आवश्यक सुधारात्मक कदम भी उठाए जा रहे हैं। हालांकि नागरिकों का मानना है कि जमीनी स्तर पर परिणाम अभी भी संतोषजनक नहीं हैं।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गोमती नदी को प्रदूषणमुक्त बनाने का लक्ष्य आखिर कब तक पूरा होगा और योजनाओं की वास्तविक स्थिति क्या है? यह सवाल जौनपुर की जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।