IIआज का पंचांग एवं ग्रहों की स्थितिII
आलोक वाजपेयी (ज्योतिषाचार्य)
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
अर्थ: हे देवी कूष्मांडा, जो अमृत से भरे कलश और रक्त से भरे कमल जैसे हाथों से धारण करती हैं, कृपया मुझ पर अपना शुभ आशीर्वाद प्रदान करें।
जय माता की
सभी को नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनायें ⚘️
IIआज का पंचांग एवं ग्रहों की स्थितिII
श्री गणेशाय नमः, जय श्री कृष्ण
सब सुखी व स्वस्थ रहें
विक्रम संवत 2082
संवत्सर नाम -: सिद्धार्थी
संवत्सर राजा-: सूर्य
संवत्सर मंत्री-: सूर्य
सूर्य उत्तरायण, ऋतु-: वसंत
सूर्य उदय : प्रातः 6/15
सूर्य अस्त : सायं 6/35
चैत्र मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि प्रात: 9/12 तक तृतीया तिथि का क्षय
अंग्रेजी दिनांक-: 1/4/2025
दिन-: मंगलवार
चंद्रमा-: मेष राशि में सायं 4/29 तक उसके बाद वृष राशि में
राशि स्वामी-: मंगल/शुक्र
आज का नक्षत्र-: भरणी प्रात: 11/07 तक उसके बाद कृत्तिका
नक्षत्र स्वामी – : शुक्र/सूर्य
️ चंद्रमा का नक्षत्र प्रवेश:
प्रात: 5/45 से भरणी नक्षत्र चरण 4 में
11/07 से कृत्तिका नक्षत्र चरण 1 में
सायं 4/30 से कृत्तिका नक्षत्र चरण 2 में
रात्रि 9/57 से कृत्तिका नक्षत्र चरण 3 में
योग -: प्रात: 9/48 तक विषकुम्भ -: ज्योतिष के मुताबिक, जब कुंडली में चंद्रमा और शनि एक-दूसरे से दृष्टि में आते हैं या इनकी युति होती है, तब विषकुंभ योग बनता है. इस योग को अशुभ माना जाता है. इस योग के कारण व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक समस्याओं के कारण समस्या आती है
उसके बाद प्रीति-: ज्योतिष में एक शुभ योग माना जाता है, जो सूर्य और चंद्रमा के बीच की दूरी पर आधारित होता है. यह योग प्रेम, संबंध और सफलता को बढ़ावा देता है.
आज के मुख्य पर्व
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दमनक चतुर्थी -: दमनक चतुर्थी का व्रत रखा जाता है और इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है. इस दिन दमनक पौधे की पूजा भी की जाती है. दमनक एक झाड़ीनुमा पौधा है. इसे मरुआ या दौना के नाम से भी जाना जाता है. यह एक सुगंधित जड़ी-बूटी है. इसके पत्तों और फूलों से दवना तेल निकलता है. दमनक के पौधे में कई औषधीय गुण होते हैं. इसका इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है.
भद्रा सायं 4/08 से रात्रि 2/33 तक
आज की शुभ दिशा -: दक्षिण-पूर्व
दिशा शूल -: उत्तर दिशा की ओर यात्रा करने से बचें, अति आवश्यक होने पर गुड खाकर प्रस्थान करें
आज की ग्रह स्थिति -:
सूर्य -: मीन राशि से रेवती नक्षत्र चरण 1 में (नक्षत्र स्वामी बुद्ध)
मंगल (वक्री) -: मिथुन राशि पुनर्वसु नक्षत्र चरण 3 में (नक्षत्र स्वामी गुरु)
बुद्ध (वक्री)उदय -: मीन राशि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र चरण 1 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
गुरु -: वृष राशि रोहिणी नक्षत्र चरण 4 में (नक्षत्र स्वामी चंद्र)
शुक्र (वक्री) -: मीन राशि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र चरण 4 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
शनि -: मीन राशि पूर्व भाद्रपद नक्षत्र चरण 4 में (नक्षत्र स्वामी गुरू)
राहु-: मीन राशि पूर्व भाद्रपद नक्षत्र चरण 4 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
केतु-: कन्या राशि उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र चरण 2 में (नक्षत्र स्वामी सूर्य)
राहु काल -: दोपहर 3/30 से 5/00 बजे तक कोई शुभ या नया कार्य न करें
दैनिक लग्न सारणी -:
प्रात: 6/50 तक मीन
8/26 तक मेष
10/21 तक वृष
दोपहर 12/36 तक मिथुन
2/55 तक कर्क
सायं 5/13 तक सिंह
7/29 तक कन्या
रात्रि 9/38 तक तुला
12/07 तक वृश्चिक
2/12 तक धनु
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जय जय श्री राधे