शरद पवार-जनता को हल्के में ना लें- इंदिरा और अटल भी हारे थे चुनाव

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनेताओं को देश मतदाताओं के प्रति गलतफहमी पाली तो वह कभी सहन नहीं करता। यहां इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे शक्तिशाली नेताओं को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विधानसभा चुनावों के दौरान ‘मी पुन्हा आई ‘ (मैं वापस आऊंगा) वाले बयान की आलोचना करते हुए पवार ने कहा कि मतदाताओं ने सोचा कि इस रुख से अहंकार की बू आती है और उन्हें लगा कि सबक सिखाया जाना चाहिए।

पवार ने शिवसेना के मुखपत्र सामना को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे जितने मार्गदर्शक हैं, उतने ही खलबली मचानेवाले भी हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की ‘ठाकरे सरकार’ को बिल्कुल भी खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के पहले का दौर देखें हैं। इन पांच वर्षों में शिवसेना और भाजपा की सरकार थी लेकिन शिवसेना के विचारोंवाले जो मतदाता हैं और जो शिवसेना कार्यकर्ता हैं उन सभी में उस सरकार के प्रति एक तरह की व्याकुलता साफ दिखाई दे रही थी।इस सबके कारण एक तो ऐसा है कि किसी भी शासक, राजनीतिज्ञ नेता को मैं ही आऊंगा, इस सोच के साथ जनता को जागीर नहीं समझना चाहिए। इस तरह की सोच में थोड़ा दंभ झलकता है। ऐसी भावना लोगों में हो गई और इन्हें सबक सिखाना चाहिए। यह विचार लोगों में फैल गया। किसी भी लोकतंत्र में नेता हम अमरत्व लेकर आए हैं, ऐसा नहीं सोच सकता है। इस देश के मतदाताओं के प्रति गलतफहमी पाली तो वह कभी सहन नहीं करता। इंदिरा गांधी जैसी जनमानस में प्रचंड समर्थन प्राप्त महिला को भी पराजय देखने को मिली। इसका अर्थ यह है कि इस देश का सामान्य इंसान लोकतांत्रिक अधिकारों के संदर्भ में हम राजनीतिज्ञों से ज्यादा सयाना है और हमारे कदम चौखट के बाहर निकल रहे हैं, ऐसा दिखा तो वह हमें भी सबक सिखाता है। इसलिए कोई भी भूमिका लेकर बैठे कि हम ही! हम ही आएंगे…तो लोगों को यह पसंद नहीं आता है।

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