जौनपुर ITI परीक्षा मामला: NCVT/SCVT और परिषद अलीगंज के नियमों की उड़ रही धज्जियां! मड़ियाहूं और शाहगंज में अव्यवस्था के बीच परीक्षा जारी!

आलोक वर्मा जौनपुर ब्यूरो,

जौनपुर ITI परीक्षा मामला: NCVT/SCVT और परिषद अलीगंज के नियमों की उड़ रही धज्जियां! मड़ियाहूं और शाहगंज में अव्यवस्था के बीच परीक्षा जारी!

​जौनपुर। जनपद के उसरांव (मड़ियाहूं) और शाहगंज परीक्षा केंद्रों पर आयोजित हो रही ऑनलाइन सीबीटी (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) परीक्षा में घोर अव्यवस्थाओं और अनियमितताओं को लेकर शासन स्तर से जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद धरातल पर स्थितियां जस की तस बनी हुई हैं। मड़ियाहूं केंद्र पर इंचार्ज की मनमानी से परीक्षा का संचालन कराया जा रहा है, वहीं जिला प्रशासन की ओर से भी कोई जिम्मेदार अधिकारी (DM, CDO या SDM) जांच के लिए मौके पर नहीं पहुंचा।
​उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (VPPUP, अलीगंज, लखनऊ), DGT और NCVT/SCVT की आधिकारिक परीक्षा नियमावली और एसओपी (SOP) का हवाला देते हुए मुख्य तकनीकी व कानूनी बिंदु सामने आ रहे हैं, जिन पर नोडल प्रबंधन और जिला प्रशासन की जवाबदेही तय होना आवश्यक है:
​1. मानक के अनुसार CCTV का बैकअप क्यों नहीं है? (NCVT व परिषद अलीगंज गाइडलाइन का उल्लंघन)
​क्या है नियम: NCVT और राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (अलीगंज, लखनऊ) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, परीक्षा केंद्रों के प्रवेश द्वार, कंप्यूटर लैब और कंट्रोल रूम में निर्बाध CCTV निगरानी अनिवार्य है। परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी परीक्षा अवधि का फुटेज और उसका नियमानुसार सुरक्षित बैकअप डीवीआर/एनवीआर में रखना कानूनी रूप से बाध्यकारी है।
​धरातल की हकीकत: मड़ियाहूं और शाहगंज केंद्रों पर सीसीटीवी फुटेज में केवल 1 हफ्ते (7 दिन) का ही बैकअप उपलब्ध होना NCVT की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सीधा उल्लंघन है। मानक क्षमता का बैकअप न रखकर पुरानी परीक्षाओं के रिकॉर्ड मिटाने की घोर लापरवाही किस मकसद से की जा रही है?
​2. अनधिकृत व्यक्तियों की तैनाती और बायोमेट्रिक में झोल (DGT व UP सरकार SOP का उल्लंघन)
​क्या है नियम: DGT और यूपी सरकार की परीक्षा नीति के तहत सीबीटी परीक्षा केंद्र में केवल अधिकृत एजेंसी कर्मचारी, पंजीकृत अभ्यर्थी और नामित कक्ष निरीक्षक (Invigilators) ही प्रवेश कर सकते हैं। आउटसोर्स परीक्षा एजेंसी (जैसे डेक्स आईटी ग्लोबल) केवल तकनीकी सहायता के लिए अधिकृत है और उसे अपनी मर्जी से किसी लोकल व्यक्ति को तैनात करने का कोई प्रशासनिक अधिकार नहीं है। इसके अलावा अभ्यर्थियों का 2-स्टेज बायोमेट्रिक सत्यापन और लाइव सर्वर लॉग अनिवार्य है।
​धरातल की हकीकत: मड़ियाहूं और शाहगंज केंद्रों पर नियमों को ताक पर रखकर आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारी द्वारा मनमाने तरीके से अनधिकृत लोकल व्यक्तियों को सहयोगी के तौर पर तैनात किया जा रहा है। बिना परिषद अलीगंज की लिखित अनुमति के बाहरी व्यक्तियों की यह तैनाती पूरी परीक्षा प्रणाली की शुचिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
​3. नोडल अधिकारी क्यों नहीं जाते परीक्षा केंद्र पर? (VPPUP पर्यवेक्षण नियमावली का उल्लंघन)
​क्या है नियम: राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (अलीगंज) के नियमों के अनुसार, जनपद के नोडल राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्य/नोडल अधिकारी पूरे जिले के परीक्षा केंद्रों के पदेन मुख्य नियंत्रक होते हैं। उनका यह वैधानिक दायित्व है कि वे समय-समय पर अधीनस्थ केंद्रों (मड़ियाहूं व शाहगंज) का औचक निरीक्षण करें और व्यवस्था की निष्पक्षता सुनिश्चित करें।
​धरातल की हकीकत: प्रशासनिक हलचल के बावजूद नोडल प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारी खुद मड़ियाहूं और शाहगंज परीक्षा केंद्रों पर धरातलीय जांच करने नहीं पहुंचे। नोडल स्तर से सीधी मॉनिटरिंग न होना विभागीय लापरवाही को दर्शाता है।
​4. बिना जिम्मेदार अधिकारियों के कैसे हो रही है परीक्षा? (SCVT केंद्र संचालन नियमावली का उल्लंघन)
​क्या है नियम: SCVT/NCVT परीक्षा संचालन नियमावली के तहत प्रत्येक केंद्र पर शासन या नोडल द्वारा अधिकृत ‘केंद्र अधीक्षक’ (Center Superintendent) और ‘स्टैटिक मजिस्ट्रेट/ऑब्जर्वर’ की मौजूदगी अनिवार्य होती है। उनकी अनुपस्थिति में परीक्षा शुरू कराया जाना पूरी तरह नियमावली के खिलाफ है।
​धरातल की हकीकत: बिना किसी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी या नोडल पर्यवेक्षक की मौजूदगी के पूरी परीक्षा प्रक्रिया को स्थानीय इंचार्ज और प्राइवेट एजेंसी के कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया है, जिससे मनमानी और गड़बड़ी की आशंका बनी हुई है।
​5. मूलभूत सुविधाओं का अभाव और राजकीय कोष का मामला (DGT इंफ्रास्ट्रक्चर मानक का उल्लंघन)
​क्या है नियम: DGT और परिषद अलीगंज के इंफ्रास्ट्रक्चर मानकों के अनुसार परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों के लिए शुद्ध पेयजल, उचित वेंटिलेशन/कूलिंग, शौचालय, बैकअप जनरेटर और क्रियाशील कंप्यूटर सिस्टम होना अनिवार्य है। इसके संचालन हेतु शासन द्वारा ‘राजकीय कोष’ (सरकारी बजट) आवंटित किया जाता है।
​धरातल की हकीकत: मड़ियाहूं और शाहगंज में भीषण गर्मी के बीच दूर-दराज से आए अभ्यर्थी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। ऐसे में यह बात सामने आ रही है कि जब परिषद अलीगंज और शासन द्वारा बजट जारी किया जाता है, तो इन केंद्रों पर अभ्यर्थियों को बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं? राजकीय कोष के उपयोग पर पारदर्शिता की मांग उठ रही है।
​मुख्यमंत्री योगी के ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन को लागू करने की मांग
​उत्तर प्रदेश की योगी सरकार परीक्षाओं में पारदर्शिता और नकलविहीन माहौल बनाए रखने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी परीक्षा में नियमों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
​स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और अभ्यर्थियों ने शासन और जौनपुर जिला प्रशासन से मांग की है कि:
​NCVT, SCVT और परिषद अलीगंज की गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन कराते हुए जौनपुर के ITI परीक्षा केंद्रों पर तत्काल ‘जीरो टॉलरेंस’ व्यवस्था लागू की जाए।
​CCTV बैकअप, अनधिकृत नियुक्तियों, सर्वर लॉग डेटा और राजकीय कोष के आवंटन की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
​(नोट: यह रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों, प्राथमिक सूचनाओं और NCVT/SCVT/VPPUP के विभागीय नियमों व मानकों पर आधारित है। इसमें किसी व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप सिद्ध नहीं होता है। मामले में नोडल प्रबंधन, परीक्षा एजेंसी एवं संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष का सदैव स्वागत है।)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *