जौनपुर ITI परीक्षा महाघोटाला: मड़ियाहूं और शाहगंज में मनमानी की परीक्षा! गायब CCTV बैकअप से लेकर अव्यवस्था तक… 5 सवाल जिनके जवाब नहीं हैं प्रशासन के पास!

आलोक वर्मा जौनपुर ब्यूरो,

जौनपुर ITI परीक्षा महाघोटाला: मड़ियाहूं और शाहगंज में मनमानी की परीक्षा! गायब CCTV बैकअप से लेकर अव्यवस्था तक… 5 सवाल जिनके जवाब नहीं हैं प्रशासन के पास!

जौनपुर। जनपद के उसरांव (मड़ियाहूं) और शाहगंज परीक्षा केंद्रों पर ऑनलाइन सीबीटी (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) परीक्षा में मचे घमासान और शासन स्तर से जांच के आदेश जारी होने के बावजूद धरातल पर स्थितियां जस की तस बनी हुई हैं। मड़ियाहूं केंद्र पर इंचार्ज की मनमानी से परीक्षा का संचालन कराया जा रहा है, वहीं जिला प्रशासन की ओर से भी कोई जिम्मेदार अधिकारी (DM, CDO या SDM) जांच के लिए मौके पर नहीं पहुंचा।
इस पूरी अव्यवस्था और प्रशासनिक खामोशी के बीच 5 ऐसे मुख्य तकनीकी व कानूनी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब नोडल प्रबंधन और जिला प्रशासन को देना ही होगा:
1. मानक के अनुसार CCTV का बैकअप क्यों गायब है?
DGT (प्रशिक्षण महानिदेशालय) और NCVT की सख्त गाइडलाइंस के अनुसार परीक्षा केंद्रों पर संपूर्ण परीक्षा अवधि का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का कड़ा नियम है। लेकिन मड़ियाहूं और शाहगंज केंद्रों पर सीसीटीवी फुटेज में महज 1 हफ्ते (7 दिन) का ही बैकअप क्यों उपलब्ध है? आखिर मानक स्टोरेज क्षमता के नियमों को ताक पर रखकर यह घोर लापरवाही किस मकसद से की जा रही है? क्या पुरानी परीक्षाओं के साक्ष्यों को मिटाने के लिए यह खेल खेला जा रहा है?
2. कोई जवाबदेह व पारदर्शी व्यवस्था लागू क्यों नहीं की गई?
ऑनलाइन परीक्षा में शुचिता बनाए रखने के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस, सख्त वेबकैम मॉनिटरिंग और सर्वर लॉग्ज की पारदर्शी व्यवस्था का होना अनिवार्य है। इसके विपरीत मड़ियाहूं और शाहगंज केंद्रों पर नियमों के प्रतिकूल जाकर आउटसोर्स एजेंसी ‘डेक्स आईटी ग्लोबल’ के कर्मचारी सुनील कुमार द्वारा अनधिकृत लोकल व्यक्तियों को सहयोगी के तौर पर तैनात किया जा रहा है। सवाल यह है कि नियमों को ठेंगा दिखाकर यह मनमानी नियुक्ति किसकी अनुमति से की गई?
3. नोडल अधिकारी क्यों नहीं जाते परीक्षा केंद्र पर?
राजकीय नोडल आईटीआई प्रबंधन का यह प्राथमिक और वैधानिक दायित्व है कि वे अपने अधीनस्थ परीक्षा केंद्रों (शाहगंज और उसरांव मड़ियाहूं) की व्यवस्था पर सीधी नजर रखें और खुद औचक निरीक्षण करें। लेकिन गंभीर आरोप लगने के बाद भी नोडल प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारी आखिर मड़ियाहूं और शाहगंज केंद्र पर खुद जाकर धरातलीय जांच क्यों नहीं कर रहे हैं?
4. बिना जिम्मेदार अधिकारियों के कैसे हो रही है परीक्षा?
NCVT/SCVT नियमावली के तहत केंद्र अधीक्षक और अधिकृत पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में ही परीक्षा की शुचिता कायम रह सकती है। बिना जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी और बिना नोडल अधिकारियों के निरीक्षण के पूरी परीक्षा को केवल स्थानीय इंचार्ज और प्राइवेट एजेंसी के कर्मचारियों की मनमानी के भरोसे कैसे छोड़ दिया गया है?
5. क्या हैं मड़ियाहूं और शाहगंज ITI के नियम-कायदे और मानक?
नियमों के अनुसार परीक्षा केंद्रों पर हाई-स्पीड इंटरनेट, जनरेटर बैकअप, प्रत्येक परीक्षार्थी के लिए मानक कंप्यूटर लैब के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अभ्यर्थियों के बैठने की बुनियादी सुविधा अनिवार्य है। परंतु धरातल पर मड़ियाहूं और शाहगंज में परीक्षार्थी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि संस्थानों के रख-रखाव और परीक्षा संचालन के लिए मिलने वाले राजकीय कोष (सरकारी बजट) का उपयोग आखिर कहां किया गया है?
मुख्यमंत्री योगी के ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन का पालन कराने की मांग
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार परीक्षाओं में पारदर्शिता और नकलविहीन माहौल बनाए रखने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का स्पष्ट विजन है कि परीक्षाओं में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार और अनिमियतता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और परीक्षार्थियों ने उत्तर प्रदेश सरकार और जौनपुर जिला प्रशासन से पुरजोर अनुरोध किया है कि:
मुख्यमंत्री जी के ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन को तत्काल प्रभाव से मड़ियाहूं और शाहगंज ITI परीक्षा केंद्रों पर लागू किया जाए।
सीसीटीवी फुटेज, राजकीय कोष के उपयोग और अनधिकृत नियुक्तियों की फॉरेंसिक व निष्पक्ष प्रशासनिक जांच कराकर दोषियों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए।
(नोट: यह रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों, प्राथमिक सूचनाओं और विभागीय नियमों/मानकों पर आधारित है। इसमें किसी व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप सिद्ध नहीं होता है। मामले में नोडल प्रबंधन, परीक्षा एजेंसी एवं संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष का सदैव स्वागत है।)

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