ITI परीक्षा मामला उसरांव, मडियाहूं : व्यवस्था में सुधार नहीं । मनमानी से चल रही परीक्षा, मड़ियाहूं केंद्र पर नहीं पहुंचे नोडल प्रिंसिपल और प्रशासनिक अधिकारी

ITI परीक्षा मामला उसरांव, मडियाहूं : व्यवस्था में सुधार नहीं । मनमानी से चल रही परीक्षा, मड़ियाहूं केंद्र पर नहीं पहुंचे नोडल प्रिंसिपल और प्रशासनिक अधिकारी

​जौनपुर। राजकीय नोडल आईटीआई सिद्दीकपुर और शाहगंज के बाद अब राजकीय आईटीआई उसरांव (मड़ियाहूं) में शुरू हुई पहली सीबीटी (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) परीक्षा में गंभीर सवाल उठने के बाद विभागीय और प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है। हालांकि, इस प्रशासनिक हड़कंप के बावजूद धरातल पर परीक्षा व्यवस्था में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। केंद्र पर अव्यवस्थाओं का आलम जस का तस बना हुआ है और मनमानी के बल पर ही पूरे तंत्र का संचालन किया जा रहा है।
​जांच से दूरी: न पहुंचे नोडल प्रिंसिपल, न जिला प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी
​परीक्षा केंद्र पर अनधिकृत लोकल व्यक्तियों की तैनाती, नकल कराने वाले सिंडिकेट की सक्रियता और भारी अव्यवस्थाओं से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि जिम्मेदार अधिकारी केंद्र का रुख करेंगे। परंतु हैरानी की बात यह रही कि मामले की गंभीरता के बावजूद नोडल प्रिंसिपल मनीष पाल स्वयं मड़ियाहूं परीक्षा केंद्र पर नहीं पहुंचे।
​इतना ही नहीं, जिला प्रशासन की ओर से भी मामले में घोर उदासीनता देखी जा रही है। जिलाधिकारी (DM), मुख्य विकास अधिकारी (CDO), उप जिलाधिकारी (SDM) मड़ियाहूं या जिला प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अब तक धरातलीय स्थिति की जांच करने केंद्र पर नहीं पहुंचा है। प्रशासनिक निगरानी न होने के कारण व्यवस्था से जुड़े लोगों के हौसले बुलंद हैं।
​छात्र मूलभूत सुविधाओं को तरसे, राजकीय कोष के दुरुपयोग के आरोप
​पहली बार सीबीटी परीक्षा केंद्र बने उसरांव मड़ियाहूं में दूर-दराज से परीक्षा देने आ रहे अभ्यर्थियों को न्यूनतम मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं हो पा रही हैं। पेयजल, सफाई व्यवस्था और डिजिटल परीक्षा हेतु आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के अभाव में छात्र परेशान नजर आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लग रहे हैं कि परीक्षा व्यवस्था और संस्थानों के रखरखाव के लिए मिलने वाले राजकीय कोष (सरकारी बजट) का समुचित और पारदर्शी उपयोग नहीं किया जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि जब शासन की ओर से बजट जारी किया जाता है, तो वह अभ्यर्थियों की सुविधाओं पर खर्च क्यों नहीं हो रहा?
​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन को ठेंगा
​उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लगातार परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता, शुचिता और नकलविहीन माहौल बनाने को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर बल देती रही है। यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि प्रदेश की प्रत्येक परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। परंतु जौनपुर में आईटीआई परीक्षा व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी और नोडल प्रबंधन मुख्यमंत्री के इस विजन को सीधे तौर पर ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। जनसामान्य में यह चर्चा तेज है कि यूपी सरकार और विभागीय उच्चाधिकारी जौनपुर के इस महत्वपूर्ण मामले पर तत्काल ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं?
​जिला प्रशासन और शासन से ‘जीरो टॉलरेंस’ लागू करने की पुरजोर मांग
​स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और अभ्यर्थियों द्वारा मांग की जा रही है कि:
​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन का कड़ाई से पालन कराते हुए जौनपुर आईटीआई परीक्षाओं में तत्काल प्रभाव से ‘जीरो टॉलरेंस’ परीक्षा व्यवस्था लागू की जाए।
​मड़ियाहूं, सिद्दीकपुर और शाहगंज केंद्रों पर राजकीय कोष के उपयोग, अव्यवस्थाओं और अनधिकृत नियुक्तियों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
​परीक्षा संचालन में मनमानी करने वाले इंचार्ज, नोडल प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएं।
​(नोट: यह रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों, प्राथमिक सूचनाओं और सूत्रों से मिले दावों पर आधारित है। इसमें किसी व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप सिद्ध नहीं होता है। मामले में नोडल प्रबंधन, परीक्षा एजेंसी एवं संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।)

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