ITI स्कूल सिद्दीकपुर मामला: जिलाधिकारी और लोकायुक्त के हस्तक्षेप की मांग, कब होगी निष्पक्ष जांच?

Alok Verma, Jaunpur Bueauro,

ITI स्कूल सिद्दीकपुर मामला: जिलाधिकारी और लोकायुक्त के हस्तक्षेप की मांग, कब होगी निष्पक्ष जांच?

GeM खरीद और 4 साल के कार्यकाल पर गहराया विवाद; क्या प्रशासन गठित करेगा स्वतंत्र जांच समिति?

जौनपुर. राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) सिद्दीकपुर, जौनपुर में सरकारी खरीद प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब ज़िला प्रशासन और उच्च स्तरीय संस्थाओं के हस्तक्षेप की मांग तेज़ हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल तैर रहा है कि जिलाधिकारी जौनपुर और लोकायुक्त जैसे सक्षम प्राधिकारी इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर जांच के आदेश कब जारी करेंगे?
जिलाधिकारी के संज्ञान और जांच समिति के गठन की उम्मीद
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में किसी भी विभाग में वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायतों पर जिलाधिकारी (DM) तत्काल संज्ञान लेकर स्वतंत्र जांच समिति (Inquiry Committee) का गठन कर सकते हैं। ITI सिद्दीकपुर में पिछले चार वर्षों की GeM (जेम) पोर्टल के जरिए हुई खरीदारी, चुनिंदा फर्मों को काम दिए जाने के आरोपों और स्थानांतरण नीति के अनुपालन की निष्पक्ष जांच के लिए डीएम स्तर से कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या लोकायुक्त तक पहुंचेगी शिकायत?
सूत्रों के अनुसार, यदि स्थानीय स्तर पर विभागीय जांच या ऑडिट में देरी होती है, तो जागरूक नागरिकों और शिकायतकर्ताओं द्वारा साक्ष्यों के साथ लोकायुक्त उत्तर प्रदेश के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी भी की जा रही है। लोकायुक्त के समक्ष मामला जाने पर पूरी प्रक्रिया का गहन और पारदर्शी ऑडिट होना तय माना जाता है।
जनहित में निष्पक्ष जांच ही एकमात्र रास्ता
मामले से जुड़े जानकारों का स्पष्ट कहना है कि:
यदि संस्थान में सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से हुई हैं, तो निष्पक्ष जांच से संबंधित अधिकारियों की स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी।
यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जांच रिपोर्ट के आधार पर जवाबदेही तय की जा सकेगी।
फिलहाल, पूरा जिला प्रशासन और विभागीय उच्चाधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
संपादकीय टिप्पणी: यह समाचार जनहित में उठाए गए प्रशासनिक पारदर्शी प्रक्रिया के सवालों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति पर पूर्व-निर्धारित आरोप लगाना नहीं, बल्कि सक्षम अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को रेखांकित करना है।

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