जौनपुर ITI परीक्षा मामला: भारी अव्यवस्था के बीच उसराँव मड़ियाहूं में आज से शुरू हुई पहली सीबीटी परीक्षा; नोडल प्रिंसिपल मनीष पाल की शह पर गोरखधंधा चलने के गंभीर आरोप

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

जौनपुर ITI परीक्षा मामला: भारी अव्यवस्था के बीच उसराँव मड़ियाहूं में आज से शुरू हुई पहली सीबीटी परीक्षा; नोडल प्रिंसिपल मनीष पाल की शह पर गोरखधंधा चलने के गंभीर आरोप

जौनपुर। राजकीय नोडल आईटीआई सिद्दीकपुर में परीक्षा संपन्न होने और शाहगंज आईटीआई में परीक्षा संचालित रहने के बीच, आज से राजकीय आईटीआई उसराँव (मड़ियाहूं) में पहली बार ऑनलाइन कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) परीक्षा भारी अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हो गई है। परीक्षा केंद्रों पर शुचिता और नियमों के क्रियान्वयन को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
तीन पालियों में 60-60 परीक्षार्थी देंगे सीबीटी परीक्षा
प्राप्त आधिकारिक जानकारियों के अनुसार, उसराँव मड़ियाहूं केंद्र पर कुल 73 कंप्यूटरों की व्यवस्था की गई है। परीक्षा का संचालन प्रतिदिन तीन पालियों में कराया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक पाली में 60-60 अभ्यर्थियों के परीक्षा देने की व्यवस्था निर्धारित की गई है। प्रथम बार सीबीटी परीक्षा केंद्र बनने के बावजूद परीक्षा स्थल पर भारी अव्यवस्था का माहौल देखा जा रहा है।
नकल सिंडिकेट सक्रिय होने और विवादित अध्यापकों की ड्यूटी का आरोप
स्थानीय सूत्रों और प्राप्त शिकायतों के अनुसार, परीक्षा केंद्र पर नकल कराने की फिराक में एक सक्रिय गिरोह की हलचल देखी जा रही है। आरोप है कि पूर्व में अनियमितताओं में संदिग्ध रहे कतिपय अध्यापकों को नियमों को दरकिनार कर परीक्षा ड्यूटी में तैनात किया गया है।
इसके अतिरिक्त, परीक्षा कराने वाली अधिकृत आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी स्थानीय स्तर पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
नियमों के विपरीत लोकल सहयोगी की नियुक्ति: नोडल प्रिंसिपल मनीष पाल पर उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारी सुनील कुमार की कार्यशैली को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि कर्मचारी सुनील कुमार ने मनमाने तरीके से नियमों के प्रतिकूल जाकर किसी लोकल व्यक्ति को सहयोगी के तौर पर नियुक्त किया है।
विभागीय जानकारों का कहना है कि नियमों के प्रतिकूल कोई कैसे इस प्रकार नियुक्ति कर सकता है? स्थानीय स्तर पर सूत्रों के अनुसार यह पूरा गोरखधंधा नोडल प्रिंसिपल मनीष पाल की शह पर हो रहा है। नोडल मुख्य अधिकारी होने के नाते उनकी छत्रछाया में इस प्रकार की मनमानी चलने की चर्चा जोरों पर है।
ज्वाइंट डायरेक्टर के निरीक्षण को बताया जा रहा खानापूर्ति
परीक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बीते कल ज्वाइंट डायरेक्टर द्वारा केंद्र का निरीक्षण किया गया था। हालांकि, स्थानीय अभ्यर्थियों और सूत्रों का कहना है कि ज्वाइंट डायरेक्टर ने केवल निरीक्षण की खानापूर्ति की, क्योंकि धरातल पर न तो विवादित कर्मियों को हटाया गया और न ही अनधिकृत नियुक्तियों पर कोई ठोस रोक लगाई गई।
प्रशासनिक जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण में नोडल प्रिंसिपल मनीष पाल की भूमिका, परीक्षा एजेंसी के कर्मचारी सुनील कुमार की कार्यप्रणाली और अनधिकृत व्यक्ति की तैनाती के बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि शासन और जिला प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो परीक्षा की निष्पक्षता पूरी तरह प्रभावित होगी।
(नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय स्तर पर प्राप्त शिकायतों, प्राथमिक सूचनाओं और सूत्रों से मिले दावों पर आधारित है। इसमें किसी व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप सिद्ध नहीं होता है। मामले में नोडल प्रबंधन, परीक्षा एजेंसी एवं संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों के आधिकारिक पक्ष का सदैव स्वागत है।)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *