जौनपुर ITI परीक्षा महाघोटाला: ‘अवध केसरी’ की खबर का ऐतिहासिक धमाका-  प्रमुख सचिव ने दिया जांच का कड़ा शासनादेश

Alok Verma, Jaunpur Bueauro,

 

जौनपुर ITI परीक्षा महाघोटाला: ‘अवध केसरी’ की खबर का ऐतिहासिक धमाका-  प्रमुख सचिव ने दिया जांच का कड़ा शासनादेश

जौनपुर ITI परीक्षा महाघोटाला: ‘अवध केसरी’ की खबर का ऐतिहासिक धमाका! 125 में से 25 कागजी प्राइवेट ITI की पोल खोलते ही हिला शासन; प्रमुख सचिव डॉ० हरिओम ने दिया जांच का कड़ा शासनादेश!

जौनपुर। जनपद के सिद्दीकपुर स्थित राजकीय नोडल आईटीआई कॉलेज सहित शाहगंज और उसरांव (मड़ियाहूं) परीक्षा केंद्रों पर खुलेआम पैसे लेकर सामूहिक नकल कराने, महज 24 घंटे में सीसीटीवी फुटेज गायब करने और परीक्षा कराने वाली आउटसोर्स एजेंसी ‘डेक्स आईटी ग्लोबल’ की काली सांठगांठ का ‘अवध केसरी’ द्वारा लगातार पर्दाफाश किए जाने के बाद शासन स्तर पर भूचाल आ गया है।
‘अवध केसरी’ की पड़ताल में खुलासा और मुख्यमंत्री से की गई मांग रंग लाई
‘अवध केसरी’ ने अपनी खोजी रिपोर्ट में उजागर किया था कि जौनपुर जनपद में कुल संचालित 125 प्राइवेट आईटीआई कॉलेजों में से लगभग 25 संस्थान धरातल पर अस्तित्व में ही नहीं हैं, बल्कि केवल कागजों पर चल रहे हैं। समाचार पत्र ने जौनपुर के जिलाधिकारी (DM) और उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से इन सभी प्राइवेट आईटीआई कॉलेजों के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराने की पुरजोर मांग उठाई थी।
इसी खबर का सीधा और अभूतपूर्व असर यह हुआ कि शासन ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया और ‘अवध केसरी’ की मांग के अनुरूप पूरे प्रदेश में जांच के ऐतिहासिक आदेश जारी कर दिए।
शासनादेश का सीधा प्रहार: प्रमुख सचिव डॉ० हरिओम ने माना ‘अपराध’, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
‘अवध केसरी’ के खुलासे के परिणाम स्वरूप व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता विभाग के प्रमुख सचिव डॉ० हरिओम (IAS) ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DM) को बेहद कड़ा शासनादेश जारी कर दिया है।
शासनादेश में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए प्रमुख सचिव ने साफ कर दिया है कि बिना मानकों के मात्र कागजों पर चल रही प्राइवेट आईटीआई की दुकानें अब नहीं चलेंगी। उन्होंने स्पष्ट लिखा है कि ऐसे फर्जी संस्थान छात्रों का समय और पैसा दोनों बर्बाद कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और ‘अपराध’ की श्रेणी में आता है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि एक विशेष तकनीकी समिति बनाकर ऐसे सभी संदिग्ध प्राइवेट आईटीआई संस्थानों का भौतिक सत्यापन और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा 15 दिनों के भीतर शासन को वैधानिक कार्रवाई की रिपोर्ट भेजी जाए।
जौनपुर में ही क्यों है प्राइवेट ITI की इतनी अंधी मांग? 90-92% अंक का काला बाजार
आखिर वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर और आजमगढ़ जैसे बड़े जिलों को छोड़ बाहरी राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान) के बच्चे जौनपुर की ही प्राइवेट आईटीआई में क्यों खिंचे चले आते हैं? ‘अवध केसरी’ की पड़ताल में वजह पूरी तरह साफ हो चुकी है—यहाँ मानक नाम की कोई चीज नहीं है! जौनपुर के प्राइवेट संस्थानों ने नोडल प्रबंधन की छत्रछाया में ‘नो-अटेंडेंस’ और 90 से 92 प्रतिशत अंक दिलाने का गुप्त सौदा कर रखा है। न छात्र को क्लास जाना है, न प्रैक्टिकल करना है, बस परीक्षा में हाजिरी दो और पैसों के दम पर अंक पत्र पाओ! शासन का यह नया आदेश जौनपुर में चल रहे इसी अंतर्राज्यीय सिंडिकेट के सीने पर सीधा वार है।
CCTV का खेल और 5-5 अध्यापकों की गश्त: साक्ष्य मिटाने की हड़बड़ी क्यों?
सिद्दीकपुर, शाहगंज और उसरांव केंद्रों पर आखिर ऐसा कौन सा पाप हो रहा है कि परीक्षा का सीसीटीवी डाटा 1 दिन बाद ही डिलीट या गायब कर दिया जाता है? साक्ष्यों को इतनी हड़बड़ी में मिटाना ही इस बात की गवाही देता है कि पूरी दाल ही काली है! इतना ही नहीं, नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक-एक कमरे में 2 की जगह 5-5 अध्यापकों को पहरेदारी में सिर्फ इसलिए खड़ा किया जाता है ताकि नकल कराने का नेटवर्क बिना किसी रुकावट के चल सके।
एजेंसी चयन में गोलमाल: नियम ताक पर रखकर ‘डेक्स आईटी ग्लोबल’ पर ही मेहरबानी क्यों?
विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए हर साल बदली जाने वाली सीबीटी परीक्षा एजेंसी को जौनपुर में बार-बार वही ‘डेक्स आईटी ग्लोबल’ की जिम्मेदारी क्यों थमा दी जाती है? क्या नोडल प्रबंधन और इस एजेंसी के बीच कोई गहरा आर्थिक रिश्ता है? केंद्र पर मौजूद एजेंसी के नुमाइंदों की मिलीभगत के बिना ऑनलाइन सीबीटी परीक्षा में यह फर्जीवाड़ा मुमकिन ही नहीं है!
DM जौनपुर के सामने अग्निपरीक्षा: अब नहीं चलेगी लच्छेदार बातें, धरातल पर हो कार्रवाई!
‘अवध केसरी’ की खबर के प्रभाव और प्रमुख सचिव डॉ० हरिओम द्वारा जिलाधिकारियों को तकनीकी जांच व भौतिक सत्यापन के सीधे अधिकार देकर दिए गए 15 दिनों के अल्टीमेटम के बाद, अब जौनपुर के जिलाधिकारी (DM) की साख दांव पर है। अगर प्रशासन वाकई निष्पक्ष है तो कागजी हिदायतों से आगे बढ़कर ये दो काम तुरंत करे:
शाहगंज, सिद्दीकपुर और उसरांव ITI केंद्रों की रोजाना की CCTV फुटेज तुरंत अपने कब्जे में लेकर जांच करवाएं, ताकि फुटेज डिलीट करने वाले सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सके।
परीक्षा कराने वाली विवादित एजेंसी ‘डेक्स आईटी ग्लोबल’ और जौनपुर में चल रहे 25 से अधिक फर्जी/कागजी प्राइवेट ITI संस्थानों पर 15 दिन के भीतर तकनीकी समिति की जांच बिठाकर सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाए।
(नोट: यह रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों, सूत्रों से मिली जानकारी और आधिकारिक शासन पत्र पर आधारित है। मामले में नोडल प्रबंधन, परीक्षा एजेंसी व संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष का सदैव स्वागत है।)

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