आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
जौनपुर ITI परीक्षा महाघोटाला: पूर्वांचल के अन्य जिलों को छोड़ आखिर जौनपुर ITI में ही क्यों उमड़ रही है भारी भीड़?
जौनपुर ITI परीक्षा महाघोटाला: पूर्वांचल के अन्य जिलों को छोड़ आखिर जौनपुर ITI में ही क्यों उमड़ रही है भारी भीड़? प्राइवेट संस्थानों के बोलबाले और अंतर्राज्यीय नेटवर्क की पूरी इनसाइड स्टोरी
जौनपुर। पूर्वांचल के शिक्षा और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक बड़ा सवाल तैर रहा है कि आजमगढ़, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर और प्रयागराज जैसे बड़े व संसाधन संपन्न जिलों को दरकिनार कर केवल जौनपुर जिले के आईटीआई संस्थानों में ही एडमिशन और परीक्षा के समय इतनी अप्रत्याशित भीड़ क्यों जुटती है? आखिर जौनपुर के प्राइवेट आईटीआई कॉलेजों का ही पूर्वांचल में इतना बोलबाला क्यों है?
इस पूरे पैटर्न का गहराई से विश्लेषण करने पर कुछ ऐसे रणनीतिक और सिंडिकेट स्तर के कारण सामने आते हैं, जो यह स्पष्ट करते हैं कि यह मांग स्वाभाविक शैक्षणिक आकर्षण नहीं, बल्कि एक सुनियोजित व्यवस्था का नतीजा है।
‘पासिंग गारंटी’ और 90 से 92 प्रतिशत अंकों का सुनियोजित एग्रीमेंट
अन्य जिलों जैसे वाराणसी या प्रयागराज में प्रशासनिक और विभागीय निगरानी अपेक्षाकृत अधिक सख्त मानी जाती है। इसके विपरीत, जौनपुर के प्राइवेट आईटीआई संस्थानों ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों के बीच एक विशेष ‘पैकेज मॉडल’ की साख बनाई है। यहाँ एडमिशन के साथ ही 90 से 92 प्रतिशत अंक दिलाने का एक अघोषित एग्रीमेंट या कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है। अन्य जिलों में इस स्तर की शत-प्रतिशत गारंटी न मिलने के कारण बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी जौनपुर का रुख करते हैं।
नोडल प्रबंधन और प्राइवेट प्रबंधनों का विशेष ‘कंफर्ट जोन’
जौनपुर में प्राइवेट आईटीआई कॉलेजों का बोलबाला होने की सबसे बड़ी वजह नोडल आईटीआई प्रशासन का अत्यधिक सहयोगात्मक रवैया है। सिद्दीकपुर स्थित राजकीय नोडल आईटीआई और प्राइवेट प्रबंधनों के बीच बना तालमेल परीक्षा केंद्रों के आवंटन, चहेते प्रभारियों की तैनाती और परीक्षाओं के दौरान ढील देने में अहम भूमिका निभाता है। पड़ोसी जिलों (जैसे आजमगढ़ या गाजीपुर) में स्थानीय प्रशासन और जांच टीमों के डर से प्राइवेट संस्थान इस तरह का खुला जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि जौनपुर में नोडल स्तर पर मिलने वाला संरक्षण प्राइवेट कॉलेजों के लिए सबसे बड़ी ढाल बनता है।
‘नो-अटेंडेंस’ मॉडल और दूर-दराज के छात्रों की सुविधा
आजमगढ़, मिर्जापुर या प्रयागराज के अधिकांश संस्थानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति या कक्षाओं में भौतिक उपस्थिति को लेकर कुछ हद तक कड़ाई रहती है। लेकिन जौनपुर के प्राइवेट आईटीआई संस्थानों की पहचान ही यह बन चुकी है कि यहाँ बाहरी राज्यों (एमपी, राजस्थान आदि) के छात्रों को साल भर क्लास करने या प्रैक्टिकल में आने की कोई मजबूरी नहीं होती। अभ्यर्थियों को केवल परीक्षा के समय हाजिरी देनी होती है। यह ‘नो-अटेंडेंस’ सुविधा बाहरी अभ्यर्थियों के लिए सबसे मुफीद साबित होती है।
अंतर्राज्यीय दलालों का मजबूत नेटवर्क
जौनपुर के प्राइवेट आईटीआई संचालकों ने वर्षों की योजना के तहत मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में अपने दलालों और कंसल्टेंट्स का एक बहुत मजबूत जाल बिछा रखा है। ये एजेंट वहां के छात्रों को जौनपुर में बिना पढ़ाई किए केवल परीक्षा देकर सरकारी नौकरियों के योग्य भारी-भरकम अंक पत्र दिलाने का भरोसा देकर दाखिला करवाते हैं। अन्य जिलों के पास इस प्रकार का संगठित अंतर्राज्यीय नेटवर्क मौजूद नहीं है।
प्रशासनिक ढील और विभागीय अनदेखी
वाराणसी और प्रयागराज जैसे जिलों में उच्च अधिकारियों, मंडलायुक्तों और सतर्कता टीमों की सीधी नजर रहती है, जिससे वहां के केंद्रों पर सामूहिक धांधली या अवैध वसूली का सिंडिकेट चलाना बेहद जोखिम भरा होता है। इसके उलट, जौनपुर में स्थानीय प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की लंबी चुप्पी और सुस्त रवैये के कारण प्राइवेट संस्थानों और नकल माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। उन्हें यह विश्वास रहता है कि शिकायतों के बावजूद धरातल पर कोई बड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।