जौनपुर ITI परीक्षा महाघोटाला: सख्त जिलाधिकारी की नाक के नीचे सिद्दीकपुर में हुई सामूहिक नकल, 2000 रुपये में खुला ठेका

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

जौनपुर ITI परीक्षा महाघोटाला: सख्त जिलाधिकारी की नाक के नीचे सिद्दीकपुर में हुई सामूहिक नकल, 2000 रुपये में खुला ठेका

जौनपुर। जनपद में अपनी कड़क और सख्त छवि के लिए जाने जाने वाले जिलाधिकारी (DM) की नाक के नीचे सिद्दीकपुर स्थित राजकीय नोडल आईटीआई कॉलेज में परीक्षा की शुचिता की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं। एक तरफ जहां जिला प्रशासन जीरो टॉलरेंस का दावा करता है, वहीं दूसरी तरफ सिद्दीकपुर नोडल केंद्र सहित शाहगंज और उसरांव (मड़ियाहूं) में सामूहिक नकल का खुला खेल खेला गया। प्राप्त जानकारियों के अनुसार, प्रति छात्र 2000 रुपये में पास कराने का बाकायदा खुला ठेका लिया गया, जिससे प्रशासनिक सतर्कता और निगरानी पर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं।
सख्त प्रशासन की साख पर बट्टा, 2000 रुपये का खुला रेट
जनपद की कमान संभाल रहे जिलाधिकारी की कड़ाई के बावजूद सिद्दीकपुर नोडल आईटीआई कॉलेज में नकल माफियाओं का दुस्साहस चरम पर देखने को मिला। परीक्षा केंद्र के भीतर और बाहर बिचौलियों के जरिए प्रति परीक्षार्थी 2000 रुपये की अवैध वसूली की गई। इस रकम के बदले अभ्यर्थियों को मनमाफिक नकल करने और शत-प्रतिशत उत्तीर्ण होने का भरोसा दिया गया। सवाल यह उठ रहा है कि जब शीर्ष स्तर पर प्रशासनिक सख्ती का दावा किया जा रहा है, तब इस तरह का संगठित सिंडिकेट खुलेआम 2000 रुपये में नकल का ठेका कैसे चला रहा था?
‘अवध केसरी’ की खबर का असर: डीएम की फटकार के बावजूद जमीनी ढील
मामले की गंभीरता और ‘अवध केसरी’ समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का बड़ा असर तब देखने को मिला जब जिलाधिकारी ने सिद्दीकपुर आईटीआई के प्रधानाचार्य व नोडल अधिकारी मनीष पाल को शाम को अपने कार्यालय तलब किया। जिलाधिकारी ने नोडल अधिकारी को सख्त लहजे में हिदायत देते हुए तत्काल सुधार करने और किसी भी स्थिति में धांधली न होने देने की चेतावनी दी। हालांकि, इस प्रशासनिक फटकार के बावजूद धरातल पर जिम्मेदार उप जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों द्वारा ठोस दंडात्मक कार्रवाई न किया जाना तंत्र की बड़ी ढील को दर्शाता है।
सीसीटीवी फुटेज की जांच से दूरी: क्या साक्ष्य मिटाने का हो रहा इंतजार?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे संदिग्ध पहलू सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की अनदेखी है। जब परीक्षा केंद्रों पर पारदर्शी व्यवस्था के लिए कैमरे लगाए गए हैं, तो एसडीएम सदर, शाहगंज और मड़ियाहूं द्वारा तत्काल सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को जब्त कर उसकी जांच क्यों नहीं कराई गई? स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि क्या जिम्मेदार अमला फुटेज का डाटा डिलीट होने, ओवरराइट होने या साक्ष्यों के गायब होने का इंतजार कर रहा है? फुटेज की समय रहते जांच न होना मामले पर पर्दा डालने की ओर इशारा करता है।
एग्जाम कराने वाली एजेंसी की भूमिका संदिग्ध
इस पूरे परीक्षा प्रकरण में परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी की भूमिका भी पूरी तरह से संदिग्ध नजर आ रही है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लग रहे हैं कि परीक्षा कराने वाली एजेंसी और नकल कराने वाले सिंडिकेट के बीच भीतर ही भीतर गहरी सांठगांठ है। एजेंसी के प्रतिनिधियों की मिलीभगत के बिना केंद्रों पर इस स्तर की धांधली संभव ही नहीं है। इसलिए यह मांग जोर पकड़ रही है कि इस पूरी परीक्षा एजेंसी की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उसके कर्मचारियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में लाया जाए।
सख्त कार्रवाई की दरकार
सख्त जिलाधिकारी की छवि को चुनौती देने वाले इस नकल सिंडिकेट पर केवल मौखिक चेतावनी काफी नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन सीसीटीवी फुटेज जब्त कर, 2000 रुपये के इस अवैध ठेके में शामिल नोडल प्रबंधन, प्राइवेट संस्थानों और परीक्षा एजेंसी के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाता है या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
(नोट: यह रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों, सूत्रों से मिली जानकारी और प्रशासनिक व विभागीय घटनाक्रमों पर आधारित है। मामले में नोडल प्रबंधन व संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।)

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