जौनपुर ITI परीक्षा घोटाला: ‘अवध केसरी’ की खबर का बड़ा असर; प्रिंसिपल मनीष पाल  डीएम के दफ्तर में तलब, दी सख्त चेतावनी, सीसीटीवी फुटेज जांच में देरी पर उठे सवाल

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

जौनपुर ITI परीक्षा घोटाला: ‘अवध केसरी’ की खबर का बड़ा असर; प्रिंसिपल मनीष पाल  डीएम के दफ्तर में तलब, दी सख्त चेतावनी, सीसीटीवी फुटेज जांच में देरी पर उठे सवाल

जौनपुर ITI परीक्षा घोटाला: ‘अवध केसरी’ की खबर का बड़ा असर; डीएम ने प्रिंसिपल मनीष पाल को दफ्तर तलब कर दी सख्त चेतावनी, सीसीटीवी फुटेज जांच में देरी पर उठे सवाल
जौनपुर। जनपद के सिद्दीकपुर स्थित राजकीय नोडल आईटीआई कॉलेज सहित शाहगंज और उसरांव (मड़ियाहूं) परीक्षा केंद्रों पर पैसे लेकर कथित रूप से सामूहिक नकल कराए जाने और व्यापक धांधली के मामले में ‘अवध केसरी’ समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। खबर का संज्ञान लेते हुए प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जौनपुर के जिलाधिकारी (DM) ने सिद्दीकपुर आईटीआई के प्रधानाचार्य और नोडल अधिकारी मनीष पाल को कल शाम अपने कार्यालय तलब किया। जिलाधिकारी ने नोडल अधिकारी को सख्त चेतावनी देते हुए तत्काल सुधार करने और किसी भी स्थिति में परीक्षाओं में नकल या अनियमितता न होने देने के कड़े निर्देश दिए हैं।
डीएम की सख्ती के बाद भी सीसीटीवी फुटेज की जांच में देरी क्यों?
‘अवध केसरी’ की खबर और जिलाधिकारी की इस सख्त हिदायत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी और अधीनस्थ प्रशासन अभी तक धरातल पर ठोस कदम उठाने से क्यों कतरा रहे हैं? सूत्रों के हवाले से यह गंभीर सवाल सामने आ रहा है कि परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच अब तक शुरू क्यों नहीं की गई? उप जिलाधिकारी सदर (SDM सदर), उप जिलाधिकारी मड़ियाहूं (SDM मड़ियाहूं) और उप जिलाधिकारी शाहगंज (SDM शाहगंज) द्वारा सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की तत्काल जांच न कराए जाने से प्रशासनिक मंशा पर संशय बना हुआ है।
जनसामान्य और पीड़ित पक्षों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या जिला प्रशासन, आईटीआई निदेशक या व्यवसायिक परीक्षा परिषद अलीगंज लखनऊ (ITI परिषद) सीसीटीवी फुटेज का डाटा डिलीट होने, ऑटो-ओवरराइट होने या साक्ष्यों के गायब होने का इंतजार कर रहे हैं? फुटेज को तत्काल तकनीकी अभिरक्षा में न लेना कई गंभीर संदेहास्पद स्थितियों को जन्म दे रहा है।
स्टोर की खरीद-फरोख्त में व्यापक गड़बड़ी और स्टोरकीपर विवाद
सामूहिक नकल के साथ-साथ सिद्दीकपुर आईटीआई कॉलेज के स्टोर में हुई खरीद-फरोख्त को लेकर भी व्यापक धांधली के संगीन आरोप सामने आ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, संस्थान में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों और उपकरणों की खरीदारी में भारी अनियमितता बरती जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि जब पोर्टल या व्यवस्था में लगभग 400 फर्में पंजीकृत हैं, तो फिर खरीद-फरोख्त के लिए केवल चुनिंदा एक या दो फर्मों को ही बार-बार ठेका या ऑर्डर क्यों दिया जा रहा है?
इतना ही नहीं, स्टोर से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी कई प्रशासनिक सवाल खड़े हो रहे हैं:
पहला, नियमों को दरकिनार कर किसी स्टोरकीपर के साथ एक अध्यापक को अटैच (संबद्ध) करने की क्या आवश्यकता पड़ी?
दूसरा, सिद्दीकपुर स्कूल के एक स्टोरकीपर का पूर्व में ट्रांसफर क्यों कराया गया था?
तीसरा, आखिर नोडल प्रधानाचार्य मनीष पाल और स्टोरकीपर के बीच बार-बार किस बात को लेकर विवाद की स्थितियां उत्पन्न होती हैं? क्या स्टोरकीपर अवैध खरीद-फरोख्त के कागजों पर हस्ताक्षर करने से मना कर रहा था या फिर इसके पीछे कोई और गहरा वित्तीय राज छिपा है?
एग्जाम कराने वाली एजेंसी की भूमिका पर जांच की मांग
इस पूरे परीक्षा महाघोटाले में परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी की भूमिका भी पूरी तरह से संदिग्ध नजर आ रही है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लग रहे हैं कि परीक्षा कराने वाली एजेंसी और नकल कराने वाले सिंडिकेट के बीच भीतर ही भीतर गहरी सांठगांठ है। एजेंसी के प्रतिनिधियों की मिलीभगत के बिना केंद्रों पर इस स्तर की धांधली संभव ही नहीं है। इसलिए यह मांग जोर पकड़ रही है कि इस पूरी परीक्षा एजेंसी की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उसके कर्मचारियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में लाया जाए।
नोडल अधिकारी की भूमिका पर गहराता संशय
सिद्दीकपुर आईटीआई के प्रधानाचार्य और जिले के नोडल अधिकारी मनीष पाल पर पूर्व से ही अपने पसंदीदा प्रभारियों की तैनाती करने, स्टोर में मनमानी खरीद-फरोख्त करने और व्यवस्था को अपने अनुकूल संचालित करने के आरोप लग रहे हैं। हालांकि खबर के असर के बाद जिलाधिकारी द्वारा उन्हें बुलाकर सख्त ताकीद की गई है, लेकिन जिस प्रकार से पूर्व में परीक्षा के दौरान हुई अव्यवस्थाओं को दबाया गया, सीसीटीवी फुटेज की जांच से दूरी बनाई गई और स्टोर से जुड़े विवादों को दबाने का प्रयास किया गया, उससे यह साफ हो जाता है कि पूरे तंत्र में प्रशासनिक ढील बनी हुई है।
प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई की दरकार
जिलाधिकारी की व्यक्तिगत सख्ती और ‘अवध केसरी’ की खबर के प्रभाव के बाद अब देखना यह होगा कि संबंधित उप जिलाधिकारी (एसडीएम सदर, शाहगंज, मड़ियाहूं) और लखनऊ स्थित विभागीय उच्चाधिकारी इस मामले में क्या व्यावहारिक कदम उठाते हैं। जब लगातार सामूहिक नकल, सीसीटीवी फुटेज साक्ष्यों की उपेक्षा, स्टोर खरीद में वित्तीय धांधली और चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाने के गंभीर बिंदु सामने आ रहे हैं, तो केवल मौखिक निर्देशों तक सीमित न रहकर इस पूरे सिंडिकेट पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जानी अत्यंत आवश्यक है, ताकि जौनपुर के मेधावी छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
(नोट: यह रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों, सूत्रों से मिली जानकारी और प्रशासनिक व विभागीय घटनाक्रमों पर आधारित है। मामले में नोडल प्रबंधन व संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।)

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