जौनपुर ITI परीक्षा घोटाला: सामूहिक नकल के आरोपों पर सीसीटीवी फुटेज जांच में देरी क्यों? खरीद-फरोख्त और स्टोरकीपर विवाद में घिरे नोडल अधिकारी मनीष पाल, जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

जौनपुर ITI परीक्षा घोटाला: सामूहिक नकल के आरोपों पर सीसीटीवी फुटेज जांच में देरी क्यों? खरीद-फरोख्त और स्टोरकीपर विवाद में घिरे नोडल अधिकारी मनीष पाल, जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

जौनपुर। जनपद के सिद्दीकपुर स्थित राजकीय नोडल आईटीआई कॉलेज सहित शाहगंज और उसरांव (मड़ियाहूं) परीक्षा केंद्रों पर पैसे लेकर कथित रूप से सामूहिक नकल कराए जाने और व्यापक धांधली के गंभीर आरोपों के बावजूद, जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ जहां परीक्षाओं की शुचिता को ताक पर रखकर अवैध वसूली और सामूहिक नकल के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूरे मामले पर प्रशासनिक तंत्र खामोश बना हुआ है।
सीसीटीवी फुटेज की जांच में देरी पर उठे सवाल: क्या डाटा गायब होने का हो रहा इंतजार?
सूत्रों के हवाले से यह बड़ा सवाल सामने आ रहा है कि परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच अब तक क्यों नहीं की गई? उप जिलाधिकारी सदर (SDM सदर), उप जिलाधिकारी मड़ियाहूं (SDM मड़ियाहूं) और उप जिलाधिकारी शाहगंज (SDM शाहगंज) द्वारा सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की तत्काल जांच न कराए जाने से प्रशासनिक मंशा पर गहरा संदेह पैदा हो रहा है।
जनसामान्य और पीड़ित पक्षों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या जिला प्रशासन, आईटीआई निदेशक या व्यवसायिक परीक्षा परिषद अलीगंज लखनऊ (ITI परिषद) सीसीटीवी फुटेज का डाटा डिलीट होने, ऑटो-ओवरराइट होने या साक्ष्यों के गायब होने का इंतजार कर रहे हैं? फुटेज को तत्काल तकनीकी अभिरक्षा में न लेना कई गंभीर संदेहास्पद स्थितियों को जन्म दे रहा है।
स्टोर की खरीद-फरोख्त में व्यापक गड़बड़ी और स्टोरकीपर विवाद
सामूहिक नकल के साथ-साथ सिद्दीकपुर आईटीआई कॉलेज के स्टोर में हुई खरीद-फरोख्त को लेकर भी व्यापक धांधली के संगीन आरोप सामने आ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, संस्थान में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों और उपकरणों की खरीदारी में भारी अनियमितता बरती जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि जब पोर्टल या व्यवस्था में लगभग 400 फर्में पंजीकृत हैं, तो फिर खरीद-फरोख्त के लिए केवल चुनिंदा एक या दो फर्मों को ही बार-बार ठेका या ऑर्डर क्यों दिया जा रहा है?
इतना ही नहीं, स्टोर से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी कई प्रशासनिक सवाल खड़े हो रहे हैं:
पहला, नियमों को दरकिनार कर किसी स्टोरकीपर के साथ एक अध्यापक को अटैच (संबद्ध) करने की क्या आवश्यकता पड़ी?
दूसरा, सिद्दीकपुर स्कूल के एक स्टोरकीपर का पूर्व में ट्रांसफर क्यों कराया गया था?
तीसरा, आखिर नोडल प्रधानाचार्य मनीष पाल और स्टोरकीपर के बीच बार-बार किस बात को लेकर विवाद की स्थितियां उत्पन्न होती हैं? क्या स्टोरकीपर अवैध खरीद-फरोख्त के कागजों पर हस्ताक्षर करने से मना कर रहा था या फिर इसके पीछे कोई और गहरा वित्तीय राज छिपा है?
एग्जाम कराने वाली एजेंसी की भूमिका पर जांच की मांग
इस पूरे परीक्षा महाघोटाले में परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी की भूमिका भी पूरी तरह से संदिग्ध नजर आ रही है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लग रहे हैं कि परीक्षा कराने वाली एजेंसी और नकल कराने वाले सिंडिकेट के बीच भीतर ही भीतर गहरी सांठगांठ है। एजेंसी के प्रतिनिधियों की मिलीभगत के बिना केंद्रों पर इस स्तर की धांधली संभव ही नहीं है। इसलिए यह मांग जोर पकड़ रही है कि इस पूरी परीक्षा एजेंसी की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उसके कर्मचारियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में लाया जाए।
नोडल अधिकारी की भूमिका पर गहराता संशय
सिद्दीकपुर आईटीआई के प्रधानाचार्य और जिले के नोडल अधिकारी मनीष पाल पर पूर्व से ही अपने पसंदीदा प्रभारियों की तैनाती करने, स्टोर में मनमानी खरीद-फरोख्त करने और व्यवस्था को अपने अनुकूल संचालित करने के आरोप लग रहे हैं। जिस प्रकार से परीक्षा के दौरान हुई अव्यवस्थाओं को दबाया गया, सीसीटीवी फुटेज की जांच से दूरी बनाई गई और स्टोर से जुड़े विवादों को दबाने का प्रयास किया गया, उससे यह साफ हो जाता है कि पूरे तंत्र को मनमाने ढंग से संचालित किया जा रहा है।
जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों की बेरुखी
इस पूरे प्रकरण में जौनपुर के जिलाधिकारी से लेकर संबंधित उप जिलाधिकारियों (एसडीएम) और लखनऊ स्थित विभागीय उच्चाधिकारियों का मौन रहना अत्यंत चिंताजनक है। जब लगातार सामूहिक नकल, सीसीटीवी फुटेज साक्ष्यों की उपेक्षा, स्टोर खरीद में वित्तीय धांधली और चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाने के गंभीर बिंदु सामने आ रहे हैं, तो फिर इस पूरे सिंडिकेट पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? प्रशासनिक शिथिलता के कारण जौनपुर के मेधावी छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
(नोट: यह रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों, सूत्रों से मिली जानकारी और प्रशासनिक व विभागीय घटनाक्रमों पर आधारित है। मामले में नोडल प्रबंधन व संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।)

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