ब्यूरो,
देश में अब भी 50 करोड़ लोगों को पौष्टिक भोजन नसीब नहीं
चीन में सिर्फ 11 प्रतिशत लोगों को नहीं मिलता पौष्टिक आहार
पाकिस्तान में हालात भयावह
नई दिल्ली।
देश के 50 करोड़ लोग अब भी ऐसे हैं, जो रोजाना पौष्टिक खाना खरीदने में सक्षम नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की नई रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में भारत की 35.5% आबादी यानी 49.5 करोड़ लोग पौष्टिक आहार नहीं खरीद सकते। हालांकि भारत में लोगों की कमाई बढ़ने और सरकारी योजनाओं के असर से पहले के मुकाबले काफी सुधार हुआ है। 2017 में 81 करोड़ लोग ऐसे थे जिनकी पहुंच पौष्टिक आहार तक नहीं थी। यानी आठ साल में 32 करोड़ लोग ऐसी स्थिति से बाहर निकले हैं। मगर, आबादी ज्यादा होने से भारत अब भी दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां सबसे ज्यादा लोग पौष्टिक भोजन नहीं खरीद पा रहे हैं।
रिपोर्ट बताती है कि पूरी दुनिया में 269 करोड़ लोग ऐसा खाना नहीं खरीद सकते, जिससे शरीर को जरूरी पोषण मिले। हालांकि, कुछ साल पहले यह संख्या 313 करोड़ से ज्यादा थी। यानी दुनिया में भी हालात सुधरे हैं, लेकिन चुनौती खत्म नहीं हुई है। चीन में सिर्फ 11% लोग पौष्टिक आहार खरीदने में दिक्कत महसूस करते हैं। मलेशिया में यह आंकड़ा सिर्फ 1.4% है। फिलीपींस में 45% लोग पौष्टिक भोजन नहीं खरीद पाते। इंडोनेशिया की स्थिति भारत से खराब है। वहां 69% आबादी पौष्टिक आहार नहीं खरीद सकती। अफ्रीका सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां हर तीन में से दो लोग पौष्टिक भोजन खरीदने में सक्षम नहीं हैं। पड़ोसी देशों में नेपाल की स्थिति काफी बेहतर है।
ऊंची कीमतें बन रहीं बड़ी समस्या
करने से समस्या हल नहीं होगी। लोगों की थाली में फल-सब्जियां, दाल-दूध, अंडे और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी होने चाहिए। मगर, इनकी कीमत कई वजहों से बढ़ जाती है। जिनमें खेत से बाजार तक पहुंचाने में ज्यादा खर्च, कोल्ड स्टोरेज और अच्छी भंडारण व्यवस्था की कमी, रास्ते में काफी फल और सब्जियों का खराब होना, डीजल, बिजली, मजदूरी व परिवहन का खर्च बढ़ना, बाढ़, सूखा और मौसम में बदलाव का असर कीमतों पर पड़ता है।