DAV कॉलेज के मैनेजमेंट पर कब्जे को लेकर हाईकोर्ट में कमिश्नर आफ पुलिस से लेकर सभी बड़े पुलिस अधिकारी तलब

ब्यूरो,

DAV कॉलेज के मैनेजमेंट पर कब्जे को लेकर हाईकोर्ट में कमिश्नर आफ पुलिस से लेकर सभी बड़े पुलिस अधिकारी तलब

पिछले सप्ताह DAV कॉलेज के मैदान पर कब्जे को लेकर कॉलेज के मैनेजर रहे स्वर्गीय मनमोहन तिवारी के बेटे आनंद मोहन, उनके क्लर्क गजेंद्र सिंह और देवेंद्र सिंह समेत एक दर्जन लोगों और 150 से अधिक अधिवक्ताओं ने जमकर महिला मनोरमा पांडे से मारपीट की थी और कई यों का सर फोड़ दिया था। इसी के बाद आनंद मोहन के ऊपर दो-दो F.I.R दर्ज हुई थी
। मामला ज़ब हाईकोर्ट पहुंचा तो वहां पर इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ खंडपीठ ने पुलिस की भूमिका पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।
ACP, लखनऊ द्वारा प्रस्तुत पेन ड्राइव की वीडियो क्लिप देखने पर कोर्ट ने पाया कि घटनास्थल पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे।
FIR और स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार कथित रूप से कुछ लोग विवादित परिसर में घुस गए थे और लगभग चार घंटे तक वहां मौजूद रहे।
कोर्ट ने कई गंभीर प्रश्न उठाए:
पुलिस वहां मौजूद होने के बावजूद मूकदर्शक क्यों बनी रही?
अतिरिक्त पुलिस बल क्यों नहीं बुलाया गया?
कथित अतिक्रमणकारियों/घुसपैठियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
पुलिस ने चार घंटे के दौरान क्या कार्रवाई की?
ACP ने बताया कि घटना सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चली और वह 2 बजे के बाद मौके पर पहुंचे, तब तक घटना समाप्त हो चुकी थी।
जब ACP से पूछा गया कि अतिरिक्त बल बुलाने के बावजूद लोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, तो उनके पास इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं था।
पुलिस पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
पैरा 13 में कोर्ट ने कहा कि:
वीडियो से प्रतीत होता है कि पुलिसकर्मी कथित अतिक्रमणकारियों के साथ काफी मित्रवत व्यवहार कर रहे थे और पूरी तरह निष्क्रिय दिखाई दे रहे थे।
कोर्ट ने यहां तक कहा कि:
स्थानीय पुलिस द्वारा इन अवैध गतिविधियों को सुविधा प्रदान करने (facilitate करने) की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
यह पुलिस के खिलाफ अत्यंत गंभीर न्यायिक टिप्पणी है।
कोर्ट के आदेश (पैरा 14 से 20)
1. अगली सुनवाई 23 जुलाई 2026 को दोपहर 2:15 बजे पुनः सूचीबद्ध किया गया।
2. पुलिस कमिश्नर को तलब, पुलिस कमिश्नर, लखनऊ को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यवाही में शामिल होने का आदेश दिया गया।
3. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति निम्न अधिकारियों को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया गया
Joint Commissioner of Police
Joint CP (Law & Order)
संबंधित DCP
संबंधित ACP
4. पुलिस कमिश्नर से जांच
पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया गया कि:
वह स्वयं मामले की जांच करें।
वीडियो देखें।
यह पता लगाएं कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उचित कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
5. वीडियो को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखना
ACP द्वारा दी गई पेन ड्राइव को कोर्ट ने अपने पास सुरक्षित रख लिया है। वीडियो को अलग से सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया गया है।
6. याचिकाकर्ता की सुरक्षा
पुलिस कमिश्नर, लखनऊ को याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
आदेश का सार (संक्षेप में)
हाईकोर्ट को प्रथम दृष्टया लगा कि:
विवादित संपत्ति/परिसर में जबरन प्रवेश या अतिक्रमण जैसी घटना हुई।
पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकी।
पुलिस की निष्क्रियता संदिग्ध है।
इसलिए कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर सहित वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा है और याचिकाकर्ता की सुरक्षा के आदेश दिए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *