आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
राजकीय ITI में विवादों का पुराना नाता, पूर्व के ‘4.20 करोड़ के खेल’ और ‘तालाबंदी’ से जुड़े वर्तमान धांधली के तार
जौनपुर। जनपद के सिद्दीकपुर स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) में परीक्षाओं के दौरान ₹2000 की कथित वसूली, फर्जी केंद्रों और 25 ‘अदृश्य’ कॉलेजों के संचालन को लेकर उठे बवंडर के बीच एक नया प्रशासनिक पहलू सामने आया है। स्थानीय स्तर पर हो रही चर्चाओं और पुराने विभागीय रिकॉर्ड्स की पड़ताल से यह साफ हो रहा है कि यह संस्थान और इसका नोडल प्रबंधन किसी तात्कालिक विवाद का शिकार नहीं है, बल्कि यहाँ अनियमितताओं और प्रशासनिक अवहेलना का एक पुराना और संगीन इतिहास रहा है।
जब जिलाधिकारी के आदेश को ठेंगे पर रख लगा दिया गया था ताला
संस्थान में प्रशासनिक लापरवाही और मनमानी का एक बड़ा उदाहरण पूर्व में भी देखने को मिला था, जब तत्कालीन जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए कार्यदिवस के दिन राजकीय आईटीआई सिद्दीकपुर में तालाबंदी पाई गई थी। प्रदेश सरकार और शासन द्वारा त्योहारी छुट्टियों के अतिरिक्त सभी सरकारी कार्यालयों को सुचारू रूप से खोलने के सख्त निर्देश दिए गए थे।
परंतु, तत्कालीन प्रशासनिक रिपोर्टों और शिकायतों के अनुसार, कॉलेज के जिम्मेदार कर्मचारियों ने नियमों की अनदेखी कर पूरे दिन दफ्तर पर ताला लटकाए रखा था। जब इस मामले में जिला प्रशासन ने नाराजगी जताई, तो जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए गाड़ियों की खराबी और कर्मचारियों के अनुपस्थित होने का हवाला दिया गया था। इस घटना ने उस वक्त भी यह बड़ा सवाल खड़ा किया था कि क्या नोडल प्रबंधन खुद को जिला प्रशासन के नियंत्रण से ऊपर समझता है?
“शिक्षा से अधिक धन उगाही…” पूर्व में प्रकाशित रिपोर्टों ने मचाया था हड़कंप
यह पहला मौका नहीं है जब सिद्दीकपुर आईटीआई और इसके नोडल तंत्र पर परीक्षा व्यवस्था को ‘व्यापार’ बनाने के संगीन आरोप लगे हों। पूर्व में भी मीडिया पड़ताल और शिकायतों के आधार पर ‘शिक्षा से अधिक धन उगाही को महत्व देते हैं आईटीआई सिद्दीकपुर के प्रधानाचार्य’ जैसे गंभीर मामलों की श्रृंखला उजागर हो चुकी है।
पूर्व में सामने आए तथ्यों में आरोप लगाए गए थे कि:
परीक्षा और प्रयोगात्मक प्रक्रियाओं के नाम पर परीक्षार्थियों से कथित रूप से अवैध धन उगाही की जाती रही है।
सिद्दीकपुर, शाहगंज और उसरांव (मड़ियाहूं) जैसे प्रमुख केंद्रों के नोडल नियंत्रण का अनुचित लाभ उठाकर एक खास सिंडिकेट को फलने-फूलने का मौका दिया गया।
विभागीय अनियमितताओं और मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने वाले कर्मचारियों का कथित रूप से उत्पीड़न और गैर-जनपद स्थानांतरण कराने का दबाव बनाया जाता रहा।
4.20 करोड़ का कथित ‘खेला’: सिस्टम पास, अनुभव फेल?
विगत वर्षों के घटनाक्रमों में राजकीय आईटीआई सिद्दीकपुर से जुड़ा लगभग 4.20 करोड़ रुपये का एक कथित संस्थागत घोटाला भी बेहद चर्चा में रहा था। उस दौरान आरोप लगे थे कि चहेते निजी संस्थानों को मनमाने ढंग से राहत देने, परीक्षा प्रणालियों को प्रभावित करने और कागजी संस्थानों को संरक्षण देने के लिए करोड़ों के खेल को अंजाम दिया गया। तब भी यह सवाल अनुत्तरित ही रह गया था कि इतने बड़े पैमाने पर शिकायतों के बावजूद तकनीकी शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी आंखें क्यों मूंदे रहे?
वर्तमान आरोपों को बल देते अतीत के साक्ष्य
अतीत के ये तमाम प्रकरण इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि वर्तमान आईटीआई परीक्षाओं में ₹2000 प्रति छात्र की कथित वसूली, कलेक्ट्रेट में सीसीटीवी कंट्रोल रूम न बनाया जाना, और 25 निजी कॉलेजों का धरातल से गायब होना कोई अचानक घटी घटना नहीं है। यह एक लंबे समय से जारी प्रशासनिक शिथिलता और कथित ऊंचे राजनैतिक/विभागीय संरक्षण का नतीजा प्रतीत होता है।
जिला प्रशासन और शासन से निष्पक्ष जांच की मांग
अतीत की इन कड़ियों के उजागर होने के बाद अब जौनपुर के नागरिकों, छात्रों और सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी जौनपुर, तकनीकी शिक्षा विभाग के डायरेक्टर और शासन से मांग की है कि:
वर्तमान परीक्षाओं (शाहगंज, सिद्दीकपुर, उसरांव) की सीसीटीवी फुटेज को तत्काल अपने कब्जे में लेकर जांच कराई जाए।
जिले के सभी 125 पंजीकृत निजी आईटीआई संस्थानों का स्थलीय (भौतिक) सत्यापन कराकर कागजी 25 कॉलेजों पर एफआईआर दर्ज की जाए।
नोडल प्रबंधन पर पूर्व में लगे 4.20 करोड़ के कथित घोटाले और तालाबंदी जैसे मामलों की फाइलों को दोबारा खोलकर उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच बैठाई जाए।