आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
जौनपुर आईटीआई घोटाला: कलेक्ट्रेट में कंट्रोल रूम क्यों नहीं, 25 कॉलेज कहाँ गायब? जिला प्रशासन और नोडल अधिकारी से 10 सीधे सवाल
जौनपुर। आईटीआई परीक्षाओं में 2000 रुपये की कथित अवैध वसूली, शाहगंज, सिद्दीकपुर और उसरांव केंद्रों पर अव्यवस्था तथा 25 कागजी कॉलेजों के संचालन को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच अब प्रशासनिक जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। जनहित में अवध केसरी जिला प्रशासन, नोडल प्रधानाचार्य मनीष पाल और तकनीकी शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों से सीधे 10 तीखे सवाल पूछता है:
सीसीटीवी पर चुप्पी क्यों? अन्य सभी बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह आईटीआई परीक्षा का सेंट्रलाइज्ड सीसीटीवी कंट्रोल रूम कलेक्ट्रेट परिसर में क्यों नहीं बनाया गया?
13 हजार छात्रों का भविष्य: शाहगंज आईटीआई में करीब 13,000 छात्र महीने भर परीक्षा दे रहे हैं, लेकिन वहां कोई स्थायी प्रधानाचार्य क्यों नहीं है?
प्रभारियों का खेल: नोडल प्रधानाचार्य मनीष पाल द्वारा केवल अपने खास अधीनस्थों को ही परीक्षा केंद्र प्रभारी बनाकर भेजने के पीछे क्या मंशा है?
सीबीटी परीक्षा में धांधली का दावा: ऑनलाइन परीक्षा के बावजूद छात्रों से 2000 रुपये की वसूली के आरोपों पर नोडल प्रबंधन ने अब तक क्या सफाई दी है?
अदृश्य 25 कॉलेज: जिले में पंजीकृत 125 में से जो 25 प्राइवेट आईटीआई कॉलेज धरातल पर मौजूद ही नहीं हैं, उनका भौतिक सत्यापन कब कराया जाएगा?
जिलाधिकारी का निरीक्षण: जब जिले में इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा में धांधली की चर्चाएं हैं, तो जिलाधिकारी या किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण क्यों नहीं किया गया?
फुटेज जब्त करने से परहेज क्यों? शाहगंज, सिद्दीकपुर और उसरांव केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज को प्रशासन तत्काल अपनी अभिरक्षा में लेकर उसकी तकनीकी जांच क्यों नहीं करा रहा?
अतीत की फाइलों का क्या हुआ? सिद्दीकपुर आईटीआई में पूर्व में हुई तालाबंदी और लगभग 4.20 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट का क्या हुआ?
राजनैतिक संरक्षण की आशंका: नोडल प्रबंधन पर लग रहे गंभीर आरोपों के बावजूद उन पर कार्रवाई न होना, क्या किसी बड़े राजनैतिक वरदहस्त का नतीजा है?
जवाबदेही किसकी? कौशल विकास मिशन की साख और हजारों युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे इस कथित खिलवाड़ की जिम्मेदारी अंततः किसकी तय होगी?
छात्रों और अभिभावकों का दर्द रूप
ग्राउंड रिपोर्ट: पैसे नहीं दिए तो भविष्य बर्बाद कर देंगे, आईटीआई परीक्षा में 2000 रुपये की वसूली से टूट रहे गरीब छात्रों के सपने
जौनपुर। हम गरीब किसान के बच्चे हैं, 2000 रुपये कहाँ से लाएं? अगर पैसे नहीं दिए तो परीक्षा में फेल करने की धमकी मिलती है। यह दर्द जौनपुर के उन हजारों छात्रों का है जो देश के कौशल विकास मिशन पर भरोसा करके आईटीआई में दाखिला लेते हैं, लेकिन परीक्षा के समय उन्हें शिक्षा माफियाओं के नेक्सस का सामना करना पड़ता है।
कंप्यूटर स्क्रीन के पीछे बेबस युवा
जौनपुर के सिद्दीकपुर, शाहगंज और उसरांव (मड़ियाहूं) केंद्रों पर परीक्षा दे रहे छात्रों का कहना है कि कहने को तो परीक्षा ऑनलाइन हो रही है और कमरों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन परीक्षा केंद्र के बाहर और अंदर की व्यवस्था पूरी तरह संदिग्ध तत्वों के हाथ में है।
एक छात्र की आपबीती: हम महीनों मेहनत करके आते हैं, लेकिन परीक्षा केंद्र के आसपास सक्रिय दलाल प्रति छात्र 2000 रुपये की मांग करते हैं। जो पैसे दे देता है, उसकी परीक्षा में पूरी मदद की जाती है। जो पैसे नहीं दे पाता, उसे मानसिक तनाव दिया जाता है।
अभिभावकों का फूटा गुस्सा
छात्रों के परिजनों का कहना है कि जब कलेक्ट्रेट में सीसीटीवी कंट्रोल रूम ही नहीं बनाया गया, तो फिर स्थानीय स्तर पर चल रही इस मनमानी को कौन रोकेगा? 25 ऐसे प्राइवेट कॉलेज कागजों पर चल रहे हैं जिनकी ज़मीन पर न कोई बिल्डिंग है और न लैब। वहां से पैसे देकर सीधे डिग्रियां बांटी जा रही हैं।
अभिभावकों ने जिलाधिकारी जौनपुर से गुहार लगाई है कि तत्काल प्रभाव से शाहगंज, सिद्दीकपुर और उसरांव परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग जब्त की जाए और युवाओं के भविष्य का सौदा करने वाले अधिकारियों व दलालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सोशल मीडिया / डिजिटल मीडिया रूप
जौनपुर आईटीआई परीक्षा महाघोटाला: क्या सीसीटीवी फुटेज खोलेगी 2000 रुपये की कथित वसूली का राज?
जौनपुर (उत्तर प्रदेश)
तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला बड़ा मामला सामने आया है! जौनपुर में आईटीआई परीक्षाओं के नाम पर गंभीर धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।
मुख्य बिंदु:
2000 रुपये में पास: ऑनलाइन परीक्षा के बावजूद प्रति छात्र 2000 रुपये की कथित वसूली का आरोप!
25 अदृश्य कॉलेज: 125 में से 25 प्राइवेट आईटीआई धरातल पर गायब, सिर्फ फाइलों में चल रही हैं डिग्रियां!
कंट्रोल रूम न होना संदेहास्पद: अन्य बोर्ड परीक्षाओं की तरह कलेक्ट्रेट में क्यों नहीं बना सेंट्रलाइज्ड सीसीटीवी कंट्रोल रूम?
प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप: सिद्दीकपुर नोडल प्रधानाचार्य मनीष पाल पर मनमाने केंद्र बनाने और चहेतों को प्रभारी बनाने का आरोप!
बड़ा सवाल: क्या नोडल प्रबंधन को किसी शीर्ष राजनैतिक नेता या मंत्री का वरदहस्त हासिल है?
जनता की मांग:
जिलाधिकारी जौनपुर तुरंत शाहगंज, सिद्दीकपुर और उसरांव केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज जब्त करें और 25 फर्जी कॉलेजों की स्थलीय जांच करवाएं!
(नोट: यह रिपोर्ट शिकायतों और जनचर्चाओं पर आधारित है। पक्ष मिलने पर प्रकाशित किया जाएगा।)