कैश मेमो मांगने पर बुजुर्ग पेंशनर को दौड़ाया- सुनीता पॉली क्लीनिक व राधा मेडिकल एजेंसी की मनमानी से नियमों की उड़ीं धज्जियां

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

कैश मेमो मांगने पर बुजुर्ग पेंशनर को दौड़ाया

सुनीता पॉली क्लीनिक व राधा मेडिकल एजेंसी की मनमानी से नियमों की उड़ीं धज्जियां

कैश मेमो मांगने पर बुजुर्ग पेंशनर को दौड़ाया; सुनीता पॉली क्लीनिक व राधा मेडिकल एजेंसी की मनमानी से नियमों की उड़ीं धज्जियां
​₹1600 की दवा का वैध बिल न मिलने से मेडिकल प्रतिपूर्ति अटकी, हस्तक्षेप के बाद भी नहीं हुआ समाधान
​जौनपुर।
शहर के सब्जी मंडी बाजार स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सामने संचालित ‘सुनीता पॉली क्लीनिक’ में इलाज कराने पहुंचे एक बुजुर्ग पेंशनर को नियमानुसार कैश मेमो मांगने पर प्रताड़ित और गुमराह किए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित का आरोप है कि क्लीनिक के नाक, कान एवं मुख रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग साहू (एम.एस.) द्वारा इलाज के उपरांत लगभग ₹1,600 मूल्य की दवाएं उपलब्ध कराई गईं और परामर्श शुल्क भी वसूला गया, परंतु भुगतान के बाद वैध कैश मेमो देने के बजाय महज एक साधारण पर्ची थमा दी गई।
​पीड़ित ने बताया कि सरकारी पेंशनर होने के नाते नियमानुसार चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) हेतु विभाग में अधिकृत कैश मेमो प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। जब उन्होंने इस संबंध में डॉ. अनुराग साहू से बिल की मांग की, तो उन्हें सदर अस्पताल के सामने स्थित ‘राधा मेडिकल एजेंसी’ से बिल लेने के लिए भेज दिया गया।
​आरोप है कि राधा मेडिकल एजेंसी पर पहुंचने के बाद भी उन्हें गुमराह किया गया और वैध कैश मेमो देने से साफ इंकार कर दिया गया। कर्मचारियों द्वारा यह तर्क दिया गया कि फिलहाल केवल ‘स्टेटमेंट’ दिया जा सकता है, क्योंकि बिल जारी करने वाला कर्मचारी छुट्टी पर है। पीड़ित कई बार चक्कर लगाते रहे, परंतु उन्हें आज तक नियमसंगत रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई।
​मामले की जानकारी मिलने पर जब मीडिया द्वारा इस पूरे प्रकरण में संबंधित चिकित्सक और राधा मेडिकल एजेंसी से उनका आधिकारिक पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो दोनों पक्षों ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उल्टे यह कह कर पल्ला झाड़ लिया गया कि “हमारे यहां इसी तरह बिल मिलता है।”
​इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग, औषधि नियंत्रण प्रशासन और वाणिज्य कर (जीएसटी) विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यदि दवाओं की बिक्री की जा रही है, तो मरीजों को नियमसंगत रसीद न देना न केवल औषधि नियमों का सीधा उल्लंघन है, बल्कि वित्तीय अनियमितता की ओर भी इशारा करता है। पीड़ित पेंशनर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), स्वास्थ्य विभाग, औषधि प्रशासन एवं अन्य सक्षम अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई करने तथा अविलंब वैध बिल उपलब्ध कराने की मांग की है।

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