विमुक्त, घुमन्तू एवं अर्ध-घुमन्तू समुदायों के समावेशन, सशक्तिकरण और प्रगति के लिए ‘समावेश उत्सव’ का आयोजन

ब्यूरो,

 

विमुक्त, घुमन्तू एवं अर्ध-घुमन्तू समुदायों के समावेशन, सशक्तिकरण और प्रगति के लिए ‘समावेश उत्सव’ का आयोजन

विमुक्त, घुमन्तू एवं अर्ध-घुमन्तू समुदायों के समावेशन, सशक्तिकरण और प्रगति के लिए ‘समावेश उत्सव’ का आयोजन

नई दिल्ली, 01 सितंबर 2026। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत गैर-अधिसूचित, घुमन्तू एवं अर्ध-घुमन्तू समुदायों के विकास एवं कल्याण बोर्ड (DWBDNC) द्वारा डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC), नई दिल्ली के भीम हॉल में ‘समावेश उत्सव’ का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य विमुक्त, घुमन्तू एवं अर्ध-घुमन्तू (DNT/NT/SNT) समुदायों के समावेशन, सशक्तिकरण एवं प्रगति को बढ़ावा देना तथा इन समुदायों के पारंपरिक कौशल, हस्तशिल्प एवं उत्पादों को व्यापक मंच प्रदान करना था।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 700 कारीगरों एवं लाभार्थियों ने भाग लिया। सीड (SEED) योजना के अंतर्गत इन समुदायों से जुड़े कारीगरों द्वारा निर्मित पारंपरिक हस्तशिल्प एवं अन्य उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए विभिन्न स्टॉल लगाए गए। NBCFDC के पार्टनर अभिकरण (PA) तथा सपोर्ट फॉर इम्प्लीमेंटेशन एंड रिसर्च (SIR) द्वारा गठित समूहों में से दो समूहों ने भी अपने हस्तनिर्मित उत्पादों के स्टॉल लगाए।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया। उन्होंने समूह की सक्रिय सदस्यों श्रीमती सुमन, मीना, मालती, सुमन बाई आदि से हस्तनिर्मित उत्पादों के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा सीड (SEED) योजना के माध्यम से समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने से संबंधित विषयों पर चर्चा की।

डीएनटी समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण योजना (SEED) के अंतर्गत इन समुदायों के कारीगरों के पारंपरिक कौशल, शिल्पकला एवं स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा। आयोजन ने कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री के साथ-साथ अपनी पारंपरिक कला और कौशल को व्यापक पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

‘समावेश उत्सव’ ने विमुक्त, घुमन्तू एवं अर्ध-घुमन्तू समुदायों की प्रतिभा, पारंपरिक कौशल और उद्यमिता को मंच प्रदान करते हुए उनके सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनी पहचान बनाई।

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