ITI परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और अवैध वसूली के आरोपों से हड़कंप, 25 निजी संस्थानों के अस्तित्व पर उठे सवाल

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

ITI परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और अवैध वसूली के आरोपों से हड़कंप, 25 निजी संस्थानों के अस्तित्व पर उठे सवाल

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में तकनीकी शिक्षा की शुचिता और परीक्षाओं के पारदर्शी संचालन को लेकर एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। जनपद के विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में चल रही परीक्षाओं में कथित प्रशासनिक शिथिलता और वित्तीय अनियमितताओं के संगीन आरोप लग रहे हैं, जिसने विभागीय अधिकारियों सहित जिला प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
परीक्षा केंद्रों का विस्तार और परीक्षार्थियों की सांख्यिकी
प्राप्त विवरण के अनुसार, जौनपुर में आईटीआई परीक्षाओं के लिए पूर्व में केवल सिद्दीकपुर और शाहगंज में ही केंद्र निर्धारित किए जाते थे। परंतु, वर्तमान परीक्षा चक्र में केंद्रों का विस्तार करते हुए मड़ियाहूं तहसील के उसरांव स्थित आईटीआई स्कूल को भी नया परीक्षा केंद्र बनाया गया है।
इन केंद्रों पर बड़े पैमाने पर परीक्षार्थियों का दबाव है:
सिद्दीकपुर आईटीआई केंद्र: यहाँ प्रतिदिन तीन पालियों में परीक्षाएं संचालित हो रही हैं, जिसमें प्रत्येक पाली में लगभग 200 छात्र सम्मिलित हो रहे हैं।
शाहगंज आईटीआई केंद्र: इस केंद्र पर कुल मिलाकर करीब 13,000 परीक्षार्थियों की परीक्षा प्रस्तावित है, जिसके कारण यहाँ लगभग एक माह तक परीक्षा कार्यक्रम चलना है।
कथित वित्तीय उगाही और प्रयोगात्मक परीक्षा में दबाव के आरोप
विभिन्न सूत्रों और परीक्षार्थियों के माध्यम से सामने आ रही अपुष्ट शिकायतों के अनुसार, परीक्षाओं में कथित तौर पर अनुचित लाभ (नकल की सुविधा) पहुंचाने के एवज में प्रति छात्र ₹2000 की अवैध मांग किए जाने के आरोप हैं। यद्यपि मुख्य सैद्धांतिक परीक्षा कंप्यूटर आधारित (CBT) माध्यम से हो रही है, तथापि छात्रों का आरोप है कि प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) और मौखिक (वाइवा) परीक्षाओं में अंक काटने अथवा अनुत्तीर्ण करने का भय दिखाकर यह दबाव बनाया जा रहा है। ज्ञात हो कि प्रयोगात्मक परीक्षाओं का आंतरिक मूल्यांकन काफी हद तक स्थानीय परीक्षा प्रभारियों के क्षेत्राधिकार में होता है।
नोडल तंत्र की कार्यप्रणाली और प्रभारियों की नियुक्ति पर संशय
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि शाहगंज और उसरांव (मड़ियाहूं) स्थित आईटीआई स्कूलों में वर्तमान में कोई स्थायी प्रधानाचार्य नियुक्त नहीं हैं। सिद्दीकपुर आईटीआई के प्रधानाचार्य मनीष पाल ही पूरे जनपद के नोडल अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नोडल प्रबंधन द्वारा कथित रूप से अपने अधीनस्थ चहेते कर्मियों को इन केंद्रों पर परीक्षा प्रभारी बनाकर भेजा गया है, जिनकी निगरानी में नियमों की अनदेखी कर कथित तौर पर अनुचित गतिविधियों और धन उगाही को संरक्षण दिया जा रहा है।
केंद्रीयकृत सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष की अनुपस्थिति पर सवाल
जौनपुर में अन्य महत्वपूर्ण प्रतियोगी एवं बोर्ड परीक्षाओं की शुचिता अक्षुण्ण रखने के लिए जिला प्रशासन कलेक्ट्रेट परिसर में एक सेंट्रलाइज्ड सीसीटीवी कंट्रोल रूम स्थापित करता है, जहां से सीधे लाइव मॉनिटरिंग होती है। आश्चर्यजनक रूप से, आईटीआई परीक्षाओं के लिए ऐसा कोई केंद्रीयकृत ढांचा कलेक्ट्रेट में स्थापित नहीं किया गया है, जो प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जानकारों का मानना है कि यदि इस परीक्षा का भी सीधा नियंत्रण कलेक्ट्रेट से होता, तो स्थानीय स्तर पर लगने वाले इन गंभीर आरोपों की संभावना ही समाप्त हो जाती।
सीसीटीवी साक्ष्यों से स्पष्ट हो सकती है वास्तविक स्थिति
इस पूरे प्रकरण में लग रहे आरोपों की सत्यता की निष्पक्ष जांच अत्यंत सरल है, बशर्ते जिला प्रशासन त्वरित संज्ञान ले। जनपद के प्रमुख परीक्षा केंद्रों—विशेषकर शाहगंज, सिद्दीकपुर और उसरांव (मड़ियाहूं)—की सीसीटीवी फुटेज इन आरोपों की वास्तविकता को स्पष्ट करने में सबसे सशक्त साक्ष्य सिद्ध हो सकती है। यदि सक्षम अधिकारियों द्वारा इन परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज को तत्काल अभिरक्षा में लेकर उसकी तकनीकी स्क्रूटनी कराई जाए, तो परीक्षा कक्षों में नियमों के पालन की वास्तविक स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।
धरातल से गायब 25 निजी कॉलेजों का दावा: गहन सत्यापन की मांग
इस मामले का दूसरा और सबसे गंभीर तकनीकी पहलू जिले में पंजीकृत निजी आईटीआई कॉलेजों के भौतिक अस्तित्व से जुड़ा है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 125 निजी आईटीआई संस्थान पंजीकृत हैं, लेकिन स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इनमें से लगभग 25 संस्थान धरातल पर क्रियाशील ही नहीं हैं। आरोप है कि ये संस्थान कथित तौर पर सिर्फ कागजी दस्तावेजों और फाइलों में संचालित हैं। पर्याप्त बुनियादी ढांचे, प्रयोगशाला (लैब) और आवश्यक शिक्षण स्टाफ के बिना इन कथित संस्थानों में छात्रों के पंजीकरण और परीक्षा के नाम पर बड़े संस्थागत फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है।
संबंधित पक्ष का वर्जन लेने का प्रयास
इस पूरे घटनाक्रम और नोडल प्रबंधन पर लगे गंभीर आरोपों के संदर्भ में ‘अवध केसरी’ संवाददाता द्वारा नोडल प्रधानाचार्य मनीष पाल से उनका पक्ष जानने हेतु संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु अपरिहार्य कारणों से उनसे संपर्क स्थापित नहीं हो सका। उनका आधिकारिक वक्तव्य प्राप्त होते ही उसे प्रमुखता से समाहित किया जाएगा।
युवाओं के भविष्य और कौशल विकास मिशन की साख
तकनीकी शिक्षा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगारपरक कौशल प्रदान करने का मुख्य माध्यम है। ऐसे में यदि इन परीक्षाओं में शुचिता का अभाव रहेगा और बिना भौतिक अस्तित्व के सिर्फ कागजों पर संस्थान चलेंगे, तो यह सरकार के महत्वाकांक्षी कौशल विकास मिशन के मूल उद्देश्यों को आघात पहुंचाएगा। वर्तमान में, इन सभी गंभीर बिंदुओं को लेकर जिलाधिकारी (DM) जौनपुर और तकनीकी शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से त्वरित हस्तक्षेप और समस्त संदिग्ध संस्थानों के भौतिक सत्यापन की मांग की जा रही है।

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