जौनपुर ITI परीक्षा महाघोटाला: ₹4 करोड़ की अवैध उगाही का खेल, ट्रांसफर रुकवाकर जमे हैं नोडल प्रिंसिपल मनीष पाल

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

जौनपुर ITI परीक्षा महाघोटाला: ₹4 करोड़ की अवैध उगाही का खेल, ट्रांसफर रुकवाकर जमे हैं नोडल प्रिंसिपल मनीष पाल

जौनपुर (शाहगंज)।
जौनपुर जिले में आईटीआई (ITI) की कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) परीक्षाओं में चल रही धांधली को लेकर एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। परीक्षा में पास कराने और सामूहिक नकल के नाम पर करोड़ों रुपये की संगठित उगाही का खेल चल रहा है, जिसके तार सीधे नोडल प्रबंधन से जुड़े होने के आरोप लग रहे हैं। इस महाघोटाले के केंद्र में नोडल प्रिंसिपल मनीष पाल की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
₹2000 प्रति छात्र की दर से ₹4 करोड़ की महा-उगाही!
सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, वर्तमान में जौनपुर जनपद के विभिन्न केंद्रों पर कुल 20,000 छात्र सीबीटी (CBT) एग्जाम दे रहे हैं। आरोप है कि इन ऑनलाइन परीक्षाओं में सामूहिक नकल कराने और मनमाफिक अंक दिलाने के एवज में प्रति छात्र ₹2,000 की फिक्स रकम वसूली जा रही है।
इस सांख्यिकी के आधार पर देखा जाए, तो परीक्षा के नाम पर कुल ₹4 करोड़ की भारी-भरकम अवैध उगाही का यह पूरा सिंडिकेट संचालित हो रहा है। छात्रों के भविष्य की कीमत पर किया जा रहा यह भ्रष्टाचार तकनीकी शिक्षा विभाग की साख को पूरी तरह मटियामेट कर रहा है।
कलाई खुलने के डर से रुकवाया ट्रांसफर, 4 साल से एक ही जगह पर कब्ज़ा
इस पूरे प्रकरण का सबसे गंभीर पहलू प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि नोडल प्रिंसिपल मनीष पाल का कुछ समय पूर्व यहाँ से तबादला (Transfer) हो चुका था। परंतु, परीक्षा के दौरान होने वाली इस करोड़ों रुपये की बड़ी उगाही के लालच और साठगांठ के चलते उन्होंने तिकड़म भिड़ाकर अपना ट्रांसफर रुकवा लिया था।
हैरानी की बात यह है कि मनीष पाल को जौनपुर में जमे हुए 4 वर्षों से भी अधिक का समय बीत चुका है, जो कि प्रशासनिक स्थानांतरण नियमों का खुला उल्लंघन है। एक ही संवेदनशील पद पर इतने लंबे समय तक बने रहने के कारण ही परीक्षा प्रभारियों की मनमानी नियुक्तियां और करोड़ों का यह भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है।
स्टोर कीपर को बंधक बनाने के मामले से भी जुड़े हैं तार
ज्ञात हो कि यह वही मामला है जिसमें शिकायत के शक में शाहगंज ITI के स्टोर कीपर मेवालाल भंडारी को शिक्षकों द्वारा ब्रीजा कार में बंधक बनाया गया था और फोन पर प्रिंसिपल मनीष पाल द्वारा गालियां दी गई थीं। उस मामले में पहले ही आजमगढ़ के पवई और सुल्तानपुर के अखंडनगर थाने में तहरीर दी जा चुकी है।
संवाददाता के सवालों से बच रहे हैं नोडल अधिकारी
इस ₹4 करोड़ के महाघोटाले और स्थानांतरण रुकवाने के संगीन आरोपों के संबंध में जब हमारे संवाददाता ने पुनः नोडल प्रिंसिपल मनीष पाल से फोन पर उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने हमेशा की तरह इस बार भी कोई जवाब नहीं दिया और फोन काट दिया।
विभागीय महानिदेशक और DM से उच्च स्तरीय जांच की मांग
धरातल से गायब 25 फर्जी निजी आईटीआई कॉलेजों के संचालन और 20 हजार छात्रों से ₹4 करोड़ की इस कथित उगाही ने शासन स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। अब छात्र संगठन और जागरूक नागरिक इस पूरे मामले की जांच विजिलेंस या किसी उच्च स्तरीय समिति से कराने, मनीष पाल को तत्काल निलंबित करने और सभी केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज जब्त करने की मांग जिलाधिकारी (DM) जौनपुर से कर रहे हैं।

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