बिजली विभाग का खेल पुराना बकाया डकार चुके पतों पर धड़ल्ले से बंट रहे नए कनेक्शन सुविधा शुल्क के आगे नीति नियम ढेर

Alok Verma, Jaunpur Bueauro,

बिजली विभाग का खेल पुराना बकाया डकार चुके पतों पर धड़ल्ले से बंट रहे नए कनेक्शन सुविधा शुल्क के आगे नीति नियम ढेर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड का यह नियम कागजों पर बहुत सख्त दिखता है कि अगर किसी परिसर पर पुराना बिजली बिल बकाया है तो वहाँ तब तक नया कनेक्शन नहीं दिया जा सकता जब तक पूरा भुगतान न हो जाए। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। राजधानी के कई डिवीजनों में विभागीय सांठगांठ और सुविधा शुल्क के खेल ने इस नियम को पूरी तरह से ठेंगा दिखा दिया है।
लाखों रुपये के बकाए वाले परिसरों पर नियमों को दरकिनार कर धड़ल्ले से नए कनेक्शन बांटे जा रहे हैं जो सीधे तौर पर बड़े भ्रष्टाचार और कॉरपोरेशन को राजस्व की भारी चपत लगाने की ओर इशारा करता है। आइए देखते हैं कुछ ऐसे मामले जो इस खेल को पूरी तरह बेनकाब करते हैं।
मामला 1 दुबग्गा डिवीजन सिकरोरी
दुबग्गा डिवीजन के अंतर्गत सिकरोरी में सुहैल हैदर प्लाट नं 110, खसरा नं 867 के खाता संख्या 9992856941 पर 13846 रुपये का बकाया चल रहा था। विभाग को इस बकाए की वसूली करनी चाहिए थी लेकिन इसके बजाय इसी पते पर हाजरा पत्नी अहमद हुसैन के नाम से खाता संख्या 0047208733 पर 3 किलोवाट का नया कनेक्शन जारी कर दिया गया।
मामला 2 पारा बुद्धेश्वर
पारा निवासी दीपक चौधरी खसरा नं 52, बुद्धेश्वर के खाता संख्या 4185543573 पर 31017 रुपये की मोटी राशि बकाया थी। विभागीय नियमों को ताक पर रखकर इसी पते पर अमित कुमार दीक्षित को खाता संख्या 9716741506 के तहत नया कनेक्शन सौंप दिया गया।
मामला 3 ठाकुरगंज मुफ्तीगंज
ठाकुरगंज के मुफ्तीगंज भवन सं 450/12, चौक में सईद हसन मेंहदी के खाता संख्या 2475670000 पर 101013 रुपये का भारी भरकम बकाया था। इतनी बड़ी रकम बकाया होने के बावजूद विभागीय मिलीभगत से इसी भवन संख्या पर सफिया बानो के नाम से खाता संख्या 5669764327 पर नया कनेक्शन चालू भी हो गया।
मामला 4 सलेमपुर पतौरा
सलेमपुर पतौरा निवासी शमीम के खाता संख्या 8032262302 पर 27809 रुपये का बिल बकाया था। वसूली की कार्रवाई करने के बजाय इसी परिसर में सुमन सिंह आवेदन संख्या जे 3379010901 को न सिर्फ नया कनेक्शन जारी किया गया बल्कि आनन फानन में केबल और मीटर भी लगा दिया गया।
सवाल क्या सुविधा शुल्क ही असली पॉलिसी है
इन मामलों को देखकर आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पावर कॉरपोरेशन की बकाए पर नया कनेक्शन न देने की नीति सिर्फ कागजी हाथी है। ईमानदार उपभोक्ता जो समय पर बिल भरते हैं उन्हें मामूली देरी पर भी कनेक्शन काटने की धमकी दी जाती है। वहीं दूसरी ओर जहाँ हजारों और लाख रुपये का बकाया है वहाँ सुविधा शुल्क यानी रिश्वत की बदौलत सारे नियम बदल जाते हैं।
यह सीधे तौर पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत का नतीजा है। अगर एक ही पते या परिसर पर बिना पुराना बकाया जमा कराए नया मीटर लग रहा है तो सिस्टम की जांच क्यों नहीं की गई। देखना यह है कि इन स्पष्ट मामलों के सामने आने के बाद पावर कॉरपोरेशन के उच्च अधिकारी बकाएदार परिसरों पर कनेक्शन देने वाले जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा।

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