अग्रिम भुगतान और यूटीआरनंबर मिस मैच
विकास कार्यों के नाम पर चहेते ठेकेदारों को एडवांस भुगतान
लेखा विभाग में नियमों को ताक पर रखने का आरोप
आलोक वर्मा संवाददाता
लखनऊ। लखनऊ नगर निगम के लेखा विभाग में वित्तीय नियमों को दरकिनार कर ठेकेदारों को काम पूरा होने से पहले ही करोड़ों रुपये का ‘अग्रिम भुगतान’ (एक्सेस एडवांस) किए जाने का एक और गंभीर मामला उजागर हुआ है। आंतरिक ऑडिट और वित्तीय समीक्षा में यह बात सामने आई है कि बिना सक्षम वित्तीय स्वीकृति और बिना काम की भौतिक प्रगति (Physical Progress) जांचे, चहेती फर्मों के खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी गई।
नियमों के मुताबिक, किसी भी निर्माण कार्य के लिए एडवांस भुगतान केवल विशेष परिस्थितियों में और कड़े दिशा-निर्देशों के तहत ही किया जा सकता है। लेकिन लेखा विभाग के कुछ पटल प्रभारियों की मिलीभगत से कई ठेकेदारों को बिना एस्टीमेट और बिना मेजरमेंट बुक (एमबी) दर्ज किए ही भुगतान जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं, बैंक ट्रांजैक्शन की जांच में कई यूटीआर नंबरों और सरकारी बही-खातों (लेज़र) के रिकॉर्ड में भी भारी अंतर पाया गया है, जिससे वित्तीय हेरफेर की आशंका और गहरी हो गई है।
इस मामले के सामने आने के बाद पार्षदों ने सदन में कड़ा रुख अपनाने की चेतावनी दी है। उनका आरोप है कि जहां एक तरफ शहर के विकास से जुड़े जरूरी कामों के फाइनल बिल महीनों तक लेखा विभाग में बजट की कमी का हवाला देकर अटकाए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ चुनिंदा फर्मों पर मेहरबानी दिखाते हुए नियमों के खिलाफ जाकर एडवांस भुगतान किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर विकास विभाग ने लेखा विभाग से पिछले एक वर्ष में किए गए सभी अग्रिम भुगतानों की सूची और उनके औचित्य की रिपोर्ट तलब की है।