नगर निगम के लेखा विभाग में करोड़ों की संपत्तियों के मिलान में गड़बड़ी, ऑडिट टीम ने उठाए सवाल
आलोक वर्मा संवाददाता
*लखनऊ।* लखनऊ नगर निगम के लेखा विभाग में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। शासन स्तर से कराई जा रही हालिया आंतरिक ऑडिट में यह बात सामने आई है कि नगर निगम की करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियों (Land and Buildings) का लेखा-जोखा मुख्य बैलेंस शीट से गायब या मिसमैच है। इस विसंगति को लेकर ऑडिट टीम ने लेखा विभाग के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मामले के अनुसार, शासन के निर्देश पर नगर निगम को अपनी सभी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन को पूरी तरह ‘डबल एंट्री एकाउंटिंग सिस्टम’ के तहत अपडेट करना था। लेकिन लेखा विभाग और संपत्ति विभाग के बीच उचित समन्वय न होने के कारण, शहर के कई वीआईपी जोनों में मौजूद व्यावसायिक संपत्तियों और जमीनों का मूल्यांकन (Valuation) सरकारी दस्तावेजों में दर्ज ही नहीं हो सका। इसके चलते बैलेंस शीट में नगर निगम की वास्तविक वित्तीय स्थिति सही तरीके से प्रदर्शित नहीं हो पा रही है।
आरोप है कि इस ढीली व्यवस्था के कारण कई ऐसी संपत्तियां, जिनसे हर साल लाखों रुपये का किराया या राजस्व आना चाहिए था, वे विभाग की फाइलों में ‘डेड एसेट’ की तरह पड़ी हुई हैं। पार्षदों ने इस मामले में लेखा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय और नगर विकास विभाग को पत्र लिखा है। विवाद बढ़ता देख अब नगर निगम प्रशासन ने सभी जोनों के संपत्ति प्रभारियों और लेखा विभाग की एक संयुक्त टीम बनाकर संपत्तियों के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) और उनके नए सिरे से मूल्यांकन के आदेश दिए हैं, ताकि वित्तीय विसंगतियों को दूर किया जा सके।