ई-टेंडरिंग घोटाला: चहेती कंपनियों को ठेके देने के लिए नियमों में हेरफेर का आरोप
आलोक वर्मा संवाददाता जौनपुर।
लखनऊ। लखनऊ नगर निगम के निर्माण और इंजीनियरिंग विभाग में ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के दौरान चहेती ठेकेदार फर्मों को फायदा पहुंचाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। पार्षदों और स्थानीय ठेकेदारों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद शासन स्तर पर इस पूरे टेंडर आवंटन खेल की आंतरिक स्क्रूटनी शुरू हो गई है। आरोप है कि वित्तीय वर्ष के कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों के ठेके ऑनलाइन प्रक्रिया में तकनीकी हेरफेर करके चुनिंदा कंपनियों की झोली में डाल दिए गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभिन्न जोनों में सड़कों के सुदृढ़ीकरण, नाला निर्माण और पार्कों के रखरखाव के लिए जारी किए गए ई-टेंडरों में ‘तकनीकी अर्हता’ (Technical Bid) के नियमों को इस तरह बदला गया कि कई अनुभवी और पुरानी फर्में रेस से बाहर हो गईं। वहीं दूसरी ओर, कुछ नई और रसूखदार फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों में ढील दी गई। टेंडर प्रक्रिया बंद होने के ठीक पहले वेबसाइट में तकनीकी खामी आने की बात कहकर समय सीमा में बदलाव किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस मामले में वित्तीय विसंगतियों की शिकायतें मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद नगर विकास विभाग ने नगर निगम प्रशासन से सभी हालिया स्वीकृत टेंडरों की मूल फाइलें और डिजिटल लॉग रिपोर्ट तलब की है। कर्मचारी यूनियनों और विपक्ष के सदस्यों का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष फॉरेंसिक ऑडिट कराई जाए, तो करोड़ों रुपये के घोटाले और अधिकारियों व ठेकेदारों के बीच की सांठगांठ का बड़ा खुलासा हो सकता है। फिलहाल, बढ़ते विवाद को देखते हुए कुछ विवादित कार्यों के वर्क ऑर्डर पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है।