एलडीए अलीगंज क्रैकडाउन
अलीगंज अग्निकांड के बाद जागा एलडीए
दस साल पुराने ध्वस्तीकरण आदेश को दबाने वाले इंजीनियर रडार पर
आलोक वर्मा संवाददाता
लखनऊ। अलीगंज क्षेत्र में एक तीन मंजिला आवासीय इमारत में हुए भीषण अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की बड़ी लापरवाही और आंतरिक मिलीभगत उजागर हुई है। इस हादसे में एक एनिमेशन सेंटर के कई छात्रों सहित पंद्रह लोगों की जान जाने के बाद अब एलडीए प्रशासन बैकफुट पर है। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसे ढहाने का आदेश एलडीए ने साल 2016 में ही जारी कर दिया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ के कारण इस पर कभी कार्रवाई नहीं हुई।
दस्तावेजों के मुताबिक, साल 2016 में इस भवन को अवैध निर्माण और आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने का दोषी पाते हुए तत्कालीन विहित प्राधिकारी ने ध्वस्तीकरण (डेमोलिशन) का अंतिम आदेश पारित किया था। इसके बावजूद महकमे के इंजीनियरों और सुपरवाइजरों ने महज दो महीने के भीतर इस फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इसी लापरवाही का नतीजा रहा कि घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र में बिना उचित फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों के वाणिज्यिक संस्थान धड़ल्ले से चलता रहा और अंततः एक बड़े हादसे का कारण बना।
हादसे के बाद उपजे जनाक्रोश को देखते हुए एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इमारत को दोबारा ढहाने का नया नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही प्राधिकरण ने उन सभी इंजीनियरों, सहायक अभियंताओं और सुपरवाइजरों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जो साल 2016 से लेकर अब तक इस क्षेत्र में तैनात रहे और जिन्होंने इस अवैध निर्माण को संरक्षण दिया। एलडीए प्रशासन का कहना है कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।