नगर निगम लखनऊ घोटाला
सफाई कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआई में करोड़ों का गबन, पांच आउटसोर्सिंग कंपनियों पर एफआईआर की तैयारी
आलोक वर्मा संवाददाता।
लखनऊ। लखनऊ नगर निगम में आउटसोर्सिंग के माध्यम से तैनात पांच हजार से अधिक सफाई कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) फंड में करोड़ों रुपये के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। लोक लेखा समिति की जांच रिपोर्ट में इस धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद अब दोषी कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर निगम प्रशासन ने इस मामले में आरोपी पांच बड़ी निजी कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दी है।
विभागीय जांच में सामने आया है कि ये आउटसोर्सिंग कंपनियां नगर निगम से तो कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआई मद का पूरा पैसा नियमित रूप से वसूलती रहीं, लेकिन उसे कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं किया गया। गरीब कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा फंड में सेंधमारी का यह खेल लंबे समय से चल रहा था। इस खुलासे के बाद कर्मचारी यूनियनों में भारी आक्रोश है और उन्होंने दोषी कंपनियों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे प्रकरण में नगर निगम के उच्च अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि जिन कंपनियों पर करोड़ों रुपये के गबन का आरोप लगा है, उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के बजाय दोबारा शहर के तीन प्रमुख जोनों में कूड़ा उठाने और सफाई व्यवस्था का ठेका दे दिया गया। चहेती फर्मों को इस तरह दोबारा काम सौंपने के फैसले ने प्रशासनिक शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस को दी गई तहरीर के बाद इस बड़े वित्तीय घोटाले की विस्तृत जांच शुरू होने की उम्मीद है।