ब्यूरो,
UP के वरिष्ठ IAS अधिकारी संजय प्रसाद के आचरण पर हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणी,
भविष्य की नियुक्तियों पर विचार के निर्देश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय प्रसाद के आचरण पर गंभीर टिप्पणी करते हुए मामले को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तथा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet-ACC) के समक्ष भेजने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित प्राधिकार इस बात पर विचार करें कि संजय प्रसाद भविष्य में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए उपयुक्त हैं या नहीं। अदालत ने अपने आदेश में उनके आचरण को गंभीर बताते हुए कहा कि उन्होंने कथित रूप से न्यायालय के अधिकार और गरिमा को कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास किया।
यह टिप्पणी पुलिस सुधारों और न्यायालय के पूर्व निर्देशों के अनुपालन से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई। अदालत ने प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा की और वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने प्राचीन भारतीय राजनयिक और अर्थशास्त्री कौटिल्य के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और अनुशासन के महत्व को रेखांकित किया। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि वरिष्ठ अधिकारियों को उनके अधीनस्थों द्वारा किए गए कर्तव्य निर्वहन में चूक के लिए जवाबदेह ठहराने संबंधी सिद्धांत विकसित करने पर विचार किया जाए।
हाईकोर्ट के इस आदेश को प्रशासनिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में इसके संभावित प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, अदालत की टिप्पणियां न्यायिक कार्यवाही के दौरान व्यक्त की गई हैं और मामले में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या अन्य कार्रवाई का अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिया जाएगा।