आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
मालवीय नगर अग्निकांड: लाइसेंस, फायर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी क्षेत्र में संचालित फ्लोरिश स्टे नामक होम-स्टे में लगी भीषण आग ने राजधानी में भवन सुरक्षा, लाइसेंसिंग व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में कई लोगों की मौत हुई है, जबकि अनेक अन्य घायल हुए हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में मृतकों में विदेशी नागरिकों के शामिल होने की भी जानकारी दी गई है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस परिसर में आग लगी, वह एक आवासीय संपत्ति है जिसे दिल्ली सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) योजना के तहत सीमित संख्या में कमरों को पर्यटकों को किराये पर देने की अनुमति प्राप्त थी। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार परिसर को छह कमरों के लिए पंजीकरण मिला था, जबकि स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि वहां कहीं अधिक कमरों में आवासीय कारोबार संचालित किया जा रहा था।
बीएंडबी योजना के नियमों के तहत स्वीकृत परिसरों में सीमित स्तर पर पर्यटक आवास की अनुमति होती है तथा परिसर में मालिक अथवा अधिकृत केयरटेकर का निवास भी आवश्यक माना जाता है। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित परिसर का संचालन व्यवहारिक रूप से एक होटल की तरह किया जा रहा था और ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से बुकिंग भी ली जा रही थी।
हादसे के बाद अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर भी प्रश्न उठे हैं। विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया है कि परिसर के पास वैध फायर एनओसी नहीं थी। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह नियामकीय अनुपालन और निरीक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
फ्लोरिश स्टे को दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा बीएंडबी श्रेणी में पंजीकृत किया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उसका लाइसेंस आगामी अवधि तक वैध था। इसके बावजूद यह सवाल उठ रहा है कि यदि परिसर में स्वीकृत क्षमता से अधिक विस्तार किया गया था तो संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और सत्यापन क्यों नहीं किया गया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हौज रानी क्षेत्र की कई गलियां अत्यंत संकरी हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हो सकते हैं। अग्निशमन विभाग और अन्य एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि भवन में सुरक्षा उपाय पर्याप्त थे या नहीं तथा आग के दौरान बचाव व्यवस्था किस स्तर पर उपलब्ध थी।
दिल्ली में हाल के महीनों में आग लगने की कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मई में विवेक विहार क्षेत्र में हुई आग की घटना में भी कई लोगों की जान गई थी। इसके बाद अग्नि सुरक्षा मानकों की समीक्षा और विशेष निरीक्षण अभियान चलाने की घोषणाएं की गई थीं।
राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा सप्ताह के दौरान स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में सुरक्षा जांच अभियान चलाए गए थे। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य संस्थानों के लिए विशेष अग्नि सुरक्षा ऑडिट और विभिन्न संवेदनशील स्थलों पर निरीक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। हालांकि मालवीय नगर की घटना के बाद इन अभियानों की प्रभावशीलता को लेकर प्रश्न उठने लगे हैं।
हाल ही में दिल्ली में फायर सेफ्टी निरीक्षण और एनओसी प्रक्रिया में बदलाव करते हुए अधिकृत थर्ड-पार्टी ऑडिटर्स को भी जांच प्रक्रिया में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे सुरक्षा जांच की प्रक्रिया में तेजी आएगी, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यवस्था की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।
फिलहाल पुलिस, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां आग लगने के कारणों, भवन के उपयोग, लाइसेंस की शर्तों के अनुपालन तथा संभावित लापरवाही के पहलुओं की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के लिए कौन-कौन सी चूकें जिम्मेदार थीं और किन स्तरों पर जवाबदेही तय की जाएगी।
मालवीय नगर अग्निकांड ने एक बार फिर राजधानी में आवासीय परिसरों के व्यावसायिक उपयोग, अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन और नियमित निरीक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता को बहस के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।