Alok Verma, Jaunpur Bueauro,
गंगा एक्सप्रेसवे: सफर आसान या जेब पर बोझ? टोल की पूरी सच्चाई
उत्तर प्रदेश का महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे, मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर लंबा, देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। दावा है कि यह पश्चिमी और पूर्वी यूपी को तेज रफ्तार से जोड़ेगा, समय बचाएगा और विकास को गति देगा। लेकिन जैसे ही टोल की चर्चा सामने आई, लोगों के बीच एक सवाल तेजी से वायरल हो गया—क्या सच में एक तरफ का टोल ₹1800 और आने-जाने में ₹3600 देना होगा?
सोशल मीडिया पर फैल रहे इन आंकड़ों ने आम आदमी को चौंका दिया है। खासकर तब, जब दोपहिया वाहनों के लिए ₹905 तक का टोल बताया जा रहा है। लेकिन क्या ये पूरी सच्चाई है? या फिर आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है?
दरअसल, एक्सप्रेसवे पर टोल का निर्धारण प्रति किलोमीटर दर के आधार पर होता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार के लिए टोल दर लगभग ₹2.55 प्रति किलोमीटर और दोपहिया के लिए करीब ₹1.28 प्रति किलोमीटर मानी जा रही है। अगर इन्हीं दरों से गणना करें तो 594 किमी की पूरी यात्रा पर कार का टोल लगभग ₹1500 से ₹1600 के बीच बैठता है। इसी तरह, बाइक का टोल ₹750 से ₹800 के आसपास बनता है।
यानी ₹1800 और ₹905 वाले आंकड़े पूरी तरह गलत नहीं हैं, लेकिन ये अधिकतम या राउंड ऑफ अनुमान हैं, जिन्हें सीधे वास्तविक टोल मान लेना ठीक नहीं होगा। असल में टोल थोड़ा कम रहने की संभावना है।
गंगा एक्सप्रेसवे टोल चार्ट (अनुमानित)
वाहन प्रकार
प्रति किमी दर (₹)
एक तरफ कुल टोल (594 किमी)
आने-जाने का टोल
कार / जीप
2.55
₹1500 – ₹1600
₹3000 – ₹3200
दोपहिया
1.28
₹750 – ₹800
₹1500 – ₹1600
हल्के कमर्शियल
4.00
₹2300 – ₹2500
₹4600 – ₹5000
ट्रक / बस
8.00
₹4500 – ₹5000
₹9000 – ₹10000
गंगा एक्सप्रेसवे का उद्देश्य केवल सफर को तेज करना नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, रोजगार और कनेक्टिविटी को बढ़ाना भी है। लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि टोल दरें आम लोगों की पहुंच में रहें। अगर टोल ज्यादा महसूस होगा, तो लोग पुराने हाईवे का ही विकल्प चुन सकते हैं, जिससे एक्सप्रेसवे का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।
फिलहाल, जो आंकड़े सोशल मीडिया पर वायरल हैं, वे पूरी तरह सटीक नहीं बल्कि आंशिक सच्चाई पर आधारित हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक टोल दरों का इंतजार करना ही समझदारी होगी।
गंगा एक्सप्रेसवे निश्चित रूप से यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर का नया अध्याय लिखेगा अब देखना यह है कि यह सफर लोगों के लिए कितना सुविधाजनक और किफायती साबित होता है।