आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
धुरंधर द रिवेंज (धुरंधर 2)
आनंद कुमार सिंह, कोलकाता
धुरंधर. द रिवेंज (धुरंधर 2) के रिलीज होने के बाद…एक अजीब बात देख रहा हूँ.. कि धुरंधर 1 को लोग भूल चुके हैं..अब केवल और केवल धुरंधर 2 की बात हो रही है. अक्षय खन्ना को भूलकर अब लोगबाग राकेश बेदी की बात कर रहे हैं…पहली फिल्म के गाने..उसके डायलॉग..भले ही कितने ही प्रभावशाली क्यों न थे..धुरंधर 2 के बाद पुरानी फिल्म को लोग भूल गये..
यह बात साबित करती है कि हमेशा चढ़ते सूरज को ही लोग सलाम करते हैं..भले ही धुरंधर 1 भी आदित्य धऱ की ही है..लेकिन धुरंधर 2 के बाद 1 को लोग भूल चुके है…इसके बाद किसी और की कोई शानदार फिल्म आये तो लोग धुरंधर 2 को भी भूल जायेंगे. यह जरूर है कि उस फिल्म को कमाई नहीं बल्कि धुरंधर 2 के क्राफ्ट और डिटेलिंग और लोगों में हुई हाइप का मुकाबला करना होगा.
अब आदित्य धऱ के सामने सबसे बड़ी चुनौती अगली फिल्म की है.
मुझे रमेश सिप्पी का किस्सा याद आता है. शोले के बाद कभी भी वह उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाये. अब आदित्य धऱ के सामने ज्यादा बड़ी मुश्किल है. मुश्किल खुद के द्वारा स्थापित मानदंडों पर खरा उतरने की है.
बेस्ट ऑफ लक टू आदित्य धर.