शोधकर्ताओं ने नोवेल कोरोना वायरस के आनुवंशिक कोड के एक खास हिस्से की पहचान की है, जो इसके जीवन चक्र को आगे बढ़ाता है। माना जा रहा है कि यह खोज कोविड-19 के उपचार के लिए दवा बनाने में मददगार साबित होगी।

टोक्यो विश्वविद्यालय के शोधकर्ता नोबुयोशी अकीमित्सू समेत वैज्ञानिकों ने बताया कि इन्फ्लूएंजा वायरस और कोरोना वायरस समेत वायरस की कई प्रजातियां आरएनए के रूप में अपने आनुवंशिक अनुक्रम को इकट्ठा करती हैं, जो मानव कोशिकाओं में प्रवेश कर जाते हैं और वहां वायरस की संख्या बढ़ाते हैं।
शोधकर्ता ने बताया कि वायरस को अपने आप को स्थिर रखने के लिए अपने आरएनए की जरूरत होती है, ताकि वे मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता से खुद को बचा सकें। यह अध्ययन जर्नल बायोकेमिकल एडं बायोफिजिकल रिसर्च कम्युनिकेशन्स में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने आनुवांशिक अनुक्रम के भविष्य का पता लगाने के लिए फेट-सीक नामक नई तकनीक का इस्तेमाल किया।
इस नई तकनीक से पता चल सकेगा कि क्या आनुवांशिक अनुक्रम बना रहेगा या समाप्त हो जाएगा। शोधकर्ता ने कहा कि इन खोज से कोविड-19 जैसी संक्रमक बीमारी के उपचार का पता लगाने में मदद मिलेगी। बता दें कि दुनिया भर में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।