ब्यूरो,

प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) एक बार फिर से खुद को जिंदा करने में जुटा है। PFI के सदस्य अपने राजनीतिक मोर्चे, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के माध्यम से एक नया संगठन लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि संगठन के नेता और कार्यकर्ता सक्रिय रूप से एसडीपीआई के साथ मिलकर एक युवा मोर्चा बनाने के लिए नए सदस्यों को शामिल कर रहे हैं। एसडीपीआई ने युवाओं को शामिल करते हुए एक नए संगठन के गठन का व्यापक संकेत दिया है। पिछले सितंबर में केंद्र सरकार ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगा दिया था। सूत्रों ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन ने अपने भर्ती के पुराने तरीकों में कुछ बदलाव भी किए हैं। भर्ती करने की प्रक्रिया अब अलग है। अब उन प्रत्येक क्षेत्रों से 4 से 5 संभावित लोगों को चुना जाता है जहां ये संगठन ऑपरेट करता है। इसके बाद उन्हें पूर्णकालिक कार्यकर्ता बनाने के लिए ट्रेनिंग और पैसे दिए जाते हैं। इसके अलावा, जब यह संगठन अपने गढ़ों में पर्याप्त सदस्यों की भर्ती कर लेता है, तो यह समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दों को उजागर करने वाली रैलियां और कार्यक्रम आयोजित करना शुरू कर देता है। अगले साल लोक सभा चुनाव से पहले एसडीपीआई द्वारा नए संगठन को लॉन्च करने की योजना बनाई जा सकती है।
पहले पीएफआई सदस्यों और नेताओं को धार्मिक केंद्रों व उनसे जुड़े संस्थानों में भर्ती किया जाता था। लेकिन जब यह संगठन और उसका भर्ती पैटर्न केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गया, तो उसने नए सदस्यों को भर्ती करने के लिए नए तरीके अपनाए। पिछले तीन महीनों में, दोनों संगठनों (पीएफआई और एसडीपीआई) के नेताओं ने त्रिवेन्द्रम में कई निजी बैठकें कीं और अगले कुछ महीनों में उत्तरी राज्यों के नेताओं के भी इन गुप्त सभाओं में शामिल होने की उम्मीद है। PFI अपने संचालन के दायरे का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके लिए पीएफआई ने साइबर विशेषज्ञों की भर्ती भी शुरू कर दी है। भर्ती किए गए लोगों को इसके साइबर विंग के लिए काम करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। माना जाता है कि संगठन ऐसे कार्यकर्ताओं की भर्ती कर रहा है, जो तकनीक में माहिर हैं और अन्य सदस्यों को जोड़ने और अपने संचालन का विस्तार करने के लिए साइबरस्पेस का पता लगाने में सक्षम हैं। सूत्रों ने बताया कि कई तकनीकी उद्यमियों ने भी संगठन को मजबूत बनाने में मदद के लिए निवेश किया है। कथित राष्ट्रविरोधी एजेंडे के लिए पिछले साल पीएफआई को पूरे देश में प्रतिबंधित कर दिया गया था। यूएपी(ए) के तहत संगठन पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था।