यदि तिब्बत क्षेत्र में हुई प्राकृतिक घटना और उससे पैदा हुए बड़े जलप्रवाह की जानकारी नेपाल को समय रहते मिल जाती तो व्यापक स्तर पर जनहानि और संपत्ति के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था: अभिषेक शाह

ब्यूरो,

नेपाल त्रासदी…

यदि तिब्बत क्षेत्र में हुई प्राकृतिक घटना और उससे पैदा हुए बड़े जलप्रवाह की जानकारी नेपाल को समय रहते मिल जाती तो व्यापक स्तर पर जनहानि और संपत्ति के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था: अभिषेक शाह

नेपाल के कपिलवस्तु क्षेत्र तीन के सांसदों – अभिषेक शाह ने भोटेकोशी में आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर चीन पर समय रहते सूचना साझा नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि तिब्बत क्षेत्र में हुई प्राकृतिक घटना और उससे पैदा हुए बड़े जलप्रवाह की जानकारी नेपाल को समय रहते मिल जाती तो व्यापक स्तर पर जनहानि और संपत्ति के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।

सांसद ने कहा कि नेपाल की प्रारंभिक तकनीकी जांच में सामने आया है कि भोटेकोशी में अचानक आया विशाल जलप्रवाह तिब्बत की तरफ से नेपाल में दाखिल हुआ। प्रारंभिक आकलन में ग्लेशियर या चट्टानी हिस्से के टूटने से पैदा हुए मलबे और पानी के तेज बहाव को आपदा की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

ऐसे में सीमा के दूसरी ओर घट रही घटना की निगरानी और तत्काल सूचना साझा करना बेहद महत्वपूर्ण था। नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिवीजन की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों को बुधवार सुबह करीब 9:05 बजे तिब्बती क्षेत्र से बड़े बाढ़ प्रवाह के भोटेकोशी में प्रवेश की सूचना मिली।

इसके बाद पानी भोटेकोशी से त्रिशूली और आगे नारायणी नदी तंत्र की ओर बढ़ा। अभिषेक शाह का कहना है कि इतनी तेजी से बढ़ने वाले जलप्रवाह में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि सीमा पार से पहले ही चेतावनी मिलती तो नदी किनारे बसे लोगों, जलविद्युत परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों और पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए समय मिल सकता था।

उन्होंने कहा कि आपदा का मूल कारण प्राकृतिक हो सकता है, लेकिन उसके प्रभाव को कम करने में समय पर चेतावनी व्यवस्था की निर्णायक भूमिका होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस आपदा में नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।

इसलिए दोनों देशों को सीमा-पार नदियों, ग्लेशियरों और संभावित झीलों की निगरानी के लिए प्रभावी रियल-टाइम सूचना तंत्र विकसित करना चाहिए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होने पर समय पर चेतावनी ही जनहानि रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम साबित हो सकती है।

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