अनपढ़, बर्फ बेचने वाला और देश का संविधान… जब इरादे मजबूत हों, तो डिग्री भी बौनी पड़ जाती है

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

 

अनपढ़, बर्फ बेचने वाला और देश का संविधान… जब इरादे मजबूत हों, तो डिग्री भी बौनी पड़ जाती है

दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का प्रदर्शन चल रहा था। नेताओं की चिल्लाहट, बड़े-बड़े मंच और राजनीतिक बयानबाजियों का शोर था। लेकिन उस पूरे हुजूम में बाजी मार गया एक बेहद साधारण सा युवक—मोहम्मद इरफान।
इरफान की कहानी कोई आम कहानी नहीं है, बल्कि उस जज्बे की मिसाल है जो आज की दुनिया को आईना दिखाती है:
बिना स्कूल गए ज्ञान का समंदर
किताबों से दूर, पर जानकारी में आगे: इरफान कभी स्कूल की सीढ़ियों तक नहीं चढ़े। न कभी कोई किताब पढ़ी, न मोबाइल की स्क्रीन पर दो शब्द टाइप करना जानते हैं।
तकनीक बनी गुरु: जब पढ़ने का जरिया नहीं था, तो उन्होंने टेक्नोलॉजी को अपना हथियार बनाया। गूगल वॉयस सर्च और यूट्यूब के जरिए सुन-सुनकर संविधान, लोकतंत्र, टैक्स सिस्टम और मजदूरों के अधिकारों की ऐसी समझ बनाई कि अच्छे-अच्छे पढ़े-लिखे दंग रह जाएं।
रोज की कमाई ₹500, सोच लाखों में एक!
दिनभर बर्फ बेचकर बमुश्किल 500 रुपये कमाने वाला यह शख्स जब कैमरे के सामने आया, तो उसने किसी भाषण की तरह नहीं, बल्कि बिल्कुल अपनी सहज भाषा में इंसानी गरिमा और हक-अधिकारों की ऐसी बात की कि वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तूफान बन गया।
“जब बात हक, अधिकार और इंसानियत की हो, तो किसी यूनिवर्सिटी की डिग्री की नहीं, बल्कि सही नीयत और गहरी समझ की जरूरत होती है।”
सड़क से सीधे राहुल गांधी के ध्यान तक!
इरफान के विचारों में इतनी ईमानदारी और धार थी कि उनकी बातें सिर्फ जनता ही नहीं, बल्कि बड़े नेताओं के कानों तक भी पहुंचीं। उनके विचारों और इस बेजोड़ जज्बे से प्रभावित होकर खुद राहुल गांधी उनसे मिलने उनके घर पहुंचे।
मोहम्मद इरफान आज उन लाखों लोगों के लिए एक मिसाल हैं जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि “सीखने की कोई उम्र और पढ़ाई की कोई शर्त नहीं होती… अगर आपके अंदर जानने की ललक है, तो इंटरनेट ही आपकी सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी बन सकता है!”

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