आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
जौनपुर ITI परीक्षा घोटाला: DM जौनपुर से रोज CCTV फुटेज चेक कराने और परीक्षा एजेंसी ‘डेक्स आईटी ग्लोबल’ की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग
जौनपुर। जनपद के सिद्दीकपुर स्थित राजकीय नोडल आईटीआई कॉलेज सहित शाहगंज और उसरांव (मड़ियाहूं) परीक्षा केंद्रों पर परीक्षाओं की पारदर्शिता और शुचिता का पूरी तरह जनाजा निकाल दिया गया है। डिजिटल इंडिया और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के दावों के बीच जिस तरह से सीबीटी और मुख्य परीक्षाओं में खुलेआम मनमानी चल रही है, उसने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
CCTV फुटेज का खेल: 1 दिन में डिलीट कर दिया जाता है डाटा!
सूत्रों से मिली सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आ रही है कि परीक्षा केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का डाटा महज 1 दिन बाद ही डिलीट या ओवरराइट कर दिया जाता है। आखिर इतने संवेदनशील परीक्षा केंद्रों का फुटेज इतनी हड़बड़ी में मिटाने के पीछे क्या मंशा है? जनसामान्य में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या साक्ष्यों को मिटाने और अपनी गर्दन बचाने के लिए फुटेज को तुरंत गायब करने का यह संगठित खेल खेला जा रहा है? अगर सब कुछ पाक-साफ है, तो सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने में प्रबंधन के हाथ-पांव क्यों फूल रहे हैं?
नियमों की सरेआम धज्जियां: 2 की जगह 5-5 टीचरों का पहरा
नियमों के अनुसार परीक्षा के दौरान एक कक्ष में अधिकतम दो वीक्षकों (शिक्षकों) की तैनाती का प्रावधान है। लेकिन सिद्दीकपुर, शाहगंज और उसरांव आईटीआई केंद्रों पर नियमों को ठेंगा दिखाते हुए एक-एक कक्ष में पांच-पांच शिक्षक घुसे रहते हैं। सवाल उठता है कि आखिर एक कमरे में इतने अध्यापकों का जमावड़ा किस मकसद से कराया जा रहा है? क्या यह भारी-भरकम शिक्षकों की फौज अभ्यर्थियों को नकल कराने और अवैध सामाग्रियों को बांटने का काम आसान बनाने के लिए लगाई जाती है?
शाहगंज और उसरांव (मड़ियाहूं) में पैसे लेकर सामूहिक नकल का खेल
प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, धांधली केवल सिद्दीकपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि शाहगंज आईटीआई और उसरांव (मड़ियाहूं) आईटीआई में भी अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलकर खुलेआम सामूहिक नकल कराई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि प्रति छात्र निश्चित रकम तय कर नकल का पूरा सिंडिकेट संचालित किया जा रहा है। ईमानदारी से पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों के हक पर डाका डालते हुए पैसों के दम पर डिग्रियां बांटने का यह नेटवर्क निर्बाध रूप से चल रहा है।
स्टोरकीपर मेवालाल पर दबाव बनाकर सुलह कराने की चर्चा
संस्थान के भीतर चल रही प्रशासनिक साठगांठ का आलम यह है कि अंदरूनी अनियमितताओं और खरीद-फरोख्त से जुड़े मामलों को दबाने के लिए कर्मचारियों पर सीधा दबाव बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सिद्दीकपुर आईटीआई के स्टोरकीपर मेवालाल के साथ हुए हालिया विवाद में उच्च अधिकारियों द्वारा भारी दबाव बनाकर जबरन सुलह कराई गई है। आखिर ऐसा कौन सा राज स्टोर में दफन है, जिसे बाहर आने से रोकने के लिए कर्मचारियों को डराया-धमकाया और दबाव में लिया जा रहा है?
एजेंसी चयन के नियमों पर बड़ा सवाल: हर साल बदलनी है एजेंसी, फिर बार-बार वही क्यों?
विभागीय और परीक्षा नियमों के अनुसार, सीबीटी परीक्षा आयोजित कराने वाली आउटसोर्स एजेंसी को आमतौर पर 1 वर्ष के बाद हटा दिया जाता है या नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और एजेंसी का स्थानीय प्रबंधन से नापाक गठजोड़ न बनने पाए। परंतु जौनपुर आईटीआई स्कूल प्रशासन नियमों को दरकिनार कर बार-बार ‘डेक्स आईटी ग्लोबल’ एजेंसी को ही परीक्षा कराने की जिम्मेदारी क्यों सौंप रहा है? आखिर जौनपुर आईटीआई प्रशासन का इस खास एजेंसी से क्या वित्तीय या व्यक्तिगत हित जुड़ा है?
जिलाधिकारी से सीधी मांग: रोज मंगाकर चेक कराएं शाहगंज, सिद्दीकपुर और उसरांव की CCTV फुटेज!
पूरे घटनाक्रम में यदि जिला प्रशासन वाकई जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल करना चाहता है, तो जौनपुर के जिलाधिकारी (DM) को तत्काल कड़ा संज्ञान लेना होगा। मांग की जा रही है कि जिलाधिकारी जौनपुर स्वयं या एक विशेष प्रशासनिक टीम गठित कर शाहगंज ITI, सिद्दीकपुर ITI और उसरांव (मड़ियाहूं) ITI केंद्रों की रोजाना की सीसीटीवी फुटेज मंगाकर उसकी गहनता से जांच करवा लें। इसके साथ ही सीबीटी परीक्षा कराने वाली एजेंसी ‘डेक्स आईटी ग्लोबल’ और उसके केंद्र पर मौजूद प्रतिनिधियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि सिर्फ 24 घंटे की सीसीटीवी फुटेज और एजेंसी के रिकॉर्ड्स की जांच हो जाए, तो नकल के पूरे खेल की पोल एक झटके में खुल जाएगी।
(नोट: यह रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों, सूत्रों से मिली जानकारी और प्रशासनिक व स्थानीय घटनाक्रमों पर आधारित है। मामले में नोडल प्रबंधन, परीक्षा एजेंसी व संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष का सदैव स्वागत है।)