सुप्रीम कोर्ट के लॉन में गूंजी संविधान की प्रस्तावना: छात्र प्रदर्शनों पर लाठीचार्ज के विरोध में उतरे वरिष्ठ वकील

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

सुप्रीम कोर्ट के लॉन में गूंजी संविधान की प्रस्तावना: छात्र प्रदर्शनों पर लाठीचार्ज के विरोध में उतरे वरिष्ठ वकील

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में पेपर लीक मामलों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में देश के सर्वोच्च न्यायालय की कानूनी बिरादरी खुलकर सामने आ गई है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर के लॉन में वकीलों के एक बड़े समूह ने इकट्ठा होकर “लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ” अभियान के तहत भारत के संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का सामूहिक पाठ किया।
कोर्ट के लंच ब्रेक के दौरान आयोजित इस शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन में वरिष्ठ वकीलों और बार के युवा सदस्यों ने एक स्वर में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के संवैधानिक मूल्यों को दोहराया। इस दौरान कई वकीलों के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और भारतीय संविधान की प्रतियां नज़र आईं।
वरिष्ठ वकीलों ने किया नेतृत्व
संविधान की प्रस्तावना के पाठ का नेतृत्व देश की नामचीन कानूनी हस्तियों, वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और पूर्व न्यायाधीश व वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर ने किया। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह भी मौजूद रहे।
इसके अलावा वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर, अंजना प्रकाश, संजय घोष, शादान फरासत, अरुंधति काटजू, महालक्ष्मी पावनी, नंदिता राव, पी.वी. सुरेंद्रनाथ, मनाली सिंघल, संगीता भारती, पी.वी. दिनेश, जयंत ठाकुर और प्रसिद्ध अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर समेत सैकड़ों वकीलों ने भाग लिया।
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का विरोध
यह कदम जंतर-मंतर पर पिछले कुछ दिनों से चल रहे छात्र प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग की कानूनी गलियारों में तीखी आलोचना हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) तथा लगभग 650 से अधिक वकीलों के एक समूह ने अलग-अलग आधिकारिक बयान जारी कर छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज और हिंसा की कड़ी निंदा की है। वकीलों ने इस पूरी घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

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